साल 2000 से पहले भारतीय क्रिकेट में हमेशा से ही मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और बैंगलोर जैसे शहरों का दबदबा रहा है, कभी कभार पंजाब, कोलकाता और चेन्नई से भी कुछ खिलाड़ी भारतीय टीम का हिस्सा बने, लेकिन देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से कोई होनहार क्रिकेटर नही निकला था, लेकिन इस सूखे को खत्म किया एक बेहद टैलेंटेड खिलाड़ी ने, जो फील्डिंग में चीते सी फुर्ती और अपनी कलात्मक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता था, हम बात कर रहे हैं एक बेहद होनहार क्रिकेटर मोह्म्मद कैफ की, मैच फिक्सिंग की काली छाया से बाहर निकलकर सौरव गांगुली की अगुवाई में भारतीय टीम जब भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सुनहरे पन्ने लिख रही थी तो कैफ उस टीम का एक जरूरी हिस्सा थे, फिर भी उनका करियर बहुत अधिक नही चला, कैफ का टीम इंडिया के साथ अंतरराष्‍ट्रीय करियर भले ही ज्‍यादा लंबा न चला हो लेकिन उन्‍होंने कई ऐसी पारियां खेली हैं, जो आज भी याद की जाती है, तो आज हम मोहम्मद कैफ के क्रिकेट करियर और उनके निजी जीवन के कुछ जाने, अनजाने और अनसुने पहलुओं को जानने की कोशिश करेंगे

मोहम्मद फैफ का जन्म प्रयागराज जिले में 01 दिसंबर 1980 को हुआ था, इनके पिता का नाम मोहम्मद तारिफ है, आपको बता दें कि इनके पिता तारिफ भी क्रिकेटर रहे हैं, इनके पिताऔर इनके भाई भी रणजी ट्राफी खेल चुके हैं, जिसकी वजह से बचपन में ही कैफ का रूझान तेजी से क्रिकेट ही ओर बढ़ा, उन्‍होंने प्रयागराज के मेवा लाल अयोध्‍या प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज सोरांव से 12वीं तक की पढ़ाई की है, लेकिन उनका मन पढ़ाई में बहुत अधिक नही लगा, जब उनके पिता ने उनके अंदर छुपा हुआ टैलेंट पहचाना तो वो कैफ को ट्रायल के लिए कानपुर के ग्रीनपार्क हॉस्टल ले गये, जहाँ उनका सेलेक्शन हो गया, और वो ग्रीनपार्क हॉस्टल में किकेट की बारीकियां सीखने लगे, जल्दी ही उनका हुनर चयनकर्ताओं की नजर में भी आ गया और उन्हें साल 2000 में भारत की अंडर 19 टीम में चुन लिया गया, जो विश्वकप खेलने श्रीलंका जा रही थी, कैफ को इस टीम की कप्तानी सौंपी गयी, हम आपको बता दें कि इस टीम में युवराज सिंह, रीतिंदर सिंह सोढ़ी और अजय रात्रा जैसे खिलाड़ी भी शामिल थे, जिन्होंने बाद में भारत के लिए क्रिकेट खेली, कैफ ने अपनी शानदार कप्तानी का नमूना पेश करते हुए भारत की अंडर 19 टीम को इस विश्वकप का विजेता बना दिया

इस शानदार जीत के बाद जल्दी ही उन्हें भारतीय टीम में भी जगह मिल गयी, साल 2000 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में कैफ को टीम इंडिया में जगह मिल गयी, बैंगलोर में खेले गये इस सीरीज के दूसरे मैच में कैफ को टीम इण्डिया की कैप पहनने का मौका मिला, इस मैच में कैफ पहली पारी में 12 और दूसरी पारी में 23 रन बनाकर आउट हुए, टेस्ट मैचों में उनका प्रदर्शन काफी उतार चढ़ाव वाला रहा, उन्होंने कुछ अच्छी पारियां खेली, लेकिन कई बार वो लंबी पारियां खेलने में असफल रहे, शायद इसी कारण उनका टेस्ट करियर सिर्फ 13 मैचों तक ही सिमट कर रह गया, इस दौरान कैफ ने 1 शतक और 3 अर्धशतकों की मंदद से 624 रन बनाये, भले ही टेस्ट मैचों में उनका सिक्का बहुत अधिक न चला हो, लेकिन वनडे टीम में उन्होंने अपनी अच्छी जगह बनाई, हालांकि कैफ को वनडे टीम में जगह बनाने के लिए लगभग डेढ़ सालों का इंतजार करना पड़ा, और उन्हें 28 जनवरी 2002 को इंग्लैण्ड के खिलाफ अपने वनडे करियर का आगाज करने का मौका मिला, भले ही कैफ एक विशेषज्ञ बल्लेबाज थे, लेकिन कैफ ने अपनी फील्डिंग से अलग पहचान बनाई, कैफ के टीम इण्डिया में सेलेक्शन के बाद अचानक ही भारत की सुस्त पड़ी फील्डिंग में एक नई जान सी आ गयी, हालाँकि इससे पहले रॉबिन सिंह के रूप में एक चपल फील्डर भारत को मिल चुका था, लेकिन वो टीम में अकेले पड़ जाते थे, और साल 2000 के करीब रॉबिन का करियर भी ढलान पर भी था, ऐसे में कैफ और उनके साथ युवराज की जुगलबंदी ने फील्डिंग के क्षेत्र में जान फूँक दी, एक ओर जहाँ युवराज ग्राउंड फील्डिंग में ढेरों रन बचा रहे थे, तो दूसरी ओर कैफ हैरतअंगेज कैच पकड़ रहे थे, अविश्वनीय रन आउट कर रहे थे, और बल्लेबाजी में भी कमाल कर रहे थे

फिर आया साल 2002 का जुलाई महीना, जब भारतीय टीम नेटवेस्ट सीरीज खेलने के लिए इंग्लैण्ड गयी, इस ट्रॉफी के फाइनल में 13 जुलाई को भारत का मुकाबला मेजबान इंग्लैंड से ही था, इस मैच में इंग्लैंड ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवरों में 325रनों का स्कोर खड़ा कर दिया, उस दौर में 325 रन बनाने का मतलब था कि जीत लगभग पक्की, लेकिन सौरव गांगुली और उनकी टीम के मन में कुछ और ही था, गांगुली ने पहले खुद 43 गेंदों पर 60 रन ठोंककर टीम को जबरदस्त शुरुआत दिलाई, लेकिन इसके बाद अचानक भारतीय टीम लडखडा गयी और टीम ने 146 रनों के स्कोर तक अपने 5 विकेट गवां दिए, जिसमे गांगुली, सहवाग, सचिन, द्रविड़ और दिनेश मोंगिया के विकेट शामिल थे, टीम की इस हालात के बाद हार साफ नजर आने लगी थी, पर मैदान पर अभी भी कैफ और युवराज की जोड़ी मौजूद थी

कैफ और युवराज की जोड़ी टीम इंडिया की सबसे बेहतर जोड़ियों में एक थी, चाहे वो बल्लेबाज़ी हो या फिर फील्डिंग, युवराज और कैफ हर जगह हिट साबित हुए थे, उनकी वो रोमांचक साझेदारी 2002 नेटवेस्ट सीरीज़ के फाइनल में भी हिट साबित हुई, कैफ ने युवराज सिंह के साथ छठे विकेट के लिए 121 रनों की साझेदारी कर टीम को जीत के मुहाने पर पंहुचा दिया, लेकिन इसके बाद युवराज आउट हो गये, फिर भी  कैफ मैदान में डटे रहे और 87 रनों की नाबाद पारी खेलकर टीम को जीत दिला कर ही लौटे, ये इन दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के करियर की सबसे यादगार पारियों में से एक थी

इस शानदार जीत के बाद ही भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सौरव गांगुली ने लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान की बालकनी में अपनी जर्सी उताकर हवा में लहराते हुए जीत का जश्न मनाया था, जो हमेशा के लिए यादगार लम्हा बन गया, कैफ की इस पारी ने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदलकर रख दी, इस जीत ने टीम में एक अलग ही जज्बा भर दिया, अब भारतीय टीम दुनिया के किसी भी मैदान पर जीतने का दम भरने लगी थी, इस बाद में कैफ ने बताया था कि उन्‍हें बल्‍लेबाजी के दौरान इंग्‍लैंड के खिलाड़ियों ने काफी तंग भी किया था, इंग्‍लैंड के कप्‍तान नासिर हुसैन ने स्‍लेज करते हुए कैफ को बस ड्राइवर कहा था, लेकिन कैफ ने इन सभी बातों को दरकिनार करते हुए करियर की शानदार पारी खेल डाली, इसके बाद कैफ भारतीय टीम के नियमित सदस्य बन गये, कैफ ऐसे फ्लेक्सिबल बल्लेबाज थे, जिन्हें टीम प्रबन्धन ने जैसे चाहा इस्तेमाल किया, कैफ को नंबर 3 से लेकर नंबर 7 तक हर क्रम में खिलाया गया और कैफ ने हर जगह खुद को साबित किया, कैफ साल 2003 में खेले गये विश्वकप का भी अहम हिस्सा रहे, गौरतलब है कि भारतीय टीम इस विश्वकप के फाइनल तक पंहुची थी जहाँ उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था

इसके बाद अगले 3-4 सालों तक कैफ टीम के महत्वपूर्ण सदस्य बने रहे, फील्डिंग में तो कैफ लगातार नये आयाम स्थापित करते जा रहे थे, लेकिन बल्लेबाजी में उनका प्रदर्शन गिरता चला जा रहा था, इस कारण उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा, उन्होंने अंतिम वनडे मैच 29 नवंबर 2006 को साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेला था, मोहम्मद कैफ 125 इंटरनेशनल वनडे मैचों में 2 शतक और 17 अर्द्धशतक की मदद से 2753 रन बनाए। जिसमें उनका सर्वाधिक स्कोर 111 रन रहा है

इसी बीच साल 2005 में भारत दौरे पर आई पाकिस्तान टीम युसूफ योहाना और कैफ के बीच का किस्सा भी काफी दिलचस्प रहा है, ये मैच कोलकाता के ईडेन गार्डन मैदान पर खेला जा रहा, युसूफ काफी संभलकर बल्लेबाजी कर रहे थे, और लग रहा था कि वो लंबी पारी खेलेंगे, लेकिन तभी कैफ किसी दूसरे खिलाड़ी की जगह फील्डिंग करने आये और लेग स्लिप में खड़े होकर कहने लगे अरे बाउंड्री वाले फील्डरों को भी भीतर बुला लो, एक भी चौका नहीं मारा और सत्तासी बॉल खेल डाली, ये बात युसूफ ने सुनी जो शायद उन्हें काफी बुरी लगी और वो अपने स्वभाव के विपरीत खेलने की कोशिश करने लगे और आउट हो गये, कैफ की जबरदस्त फील्डिंग गेंदबाजों का हौसला दोगुना कर देती थी

घरेलू क्रिकेट में भी इस खिलाड़ी ने बल्‍ले के साथ ही कप्‍तानी में भी कमाल किया, उत्‍तर प्रदेश की टीम उनके नेतृत्‍व में काफी मजबूत मानी जाती थी.,उनकी कप्‍तानी में सुरेश रैना, आरपी सिंह, प्रवीण कुमार जैसे क्रिकेटरों ने नाम कमाया और बाद में टीम इंडिया में जगह भी बनाई, फर्स्‍ट क्‍लास क्रिकेट में कैफ ने 186 मैचों में 19 शतक व 59 अर्धशतकों की मदद से 10229 रन बनाए, वहीं लिस्‍ट ए में उन्‍होंने 269 मैच में 6 शतक व 59 अर्धशतक उड़ाए और 7763 रन बनाए

अगर कैफ के निजी जीवन की बात करें तो साल 2011 में मोहम्मद कैफ और पूजा यादव की शादी हुई थी, नोएडा में उनकी शादी हुई, पूजा दिल्ली में बतौर जर्नलिस्ट काम करती थीं, दोनों की मुलाकात एक फ्रेंड के जरिए हुई थी और चार साल की डेटिंग के बाद इस कपल ने शादी का फैसला किया था, स्टार क्रिकेटर से शादी करने के बाद भी पूजा लाइमलाइट से दूर ही रहीं, अभी कैफ और पूजा एक बेटा कबीर और एक बेटी भी है, इसके बाद कैफ ने राजनीति में भी हाथ आजमाया, और साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इलाहबाद की फूलपुर सीट से कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़े, हालांकि उन्हें इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा

इसी बीच कैफ ने आईपीएल में कई टीमों के लिए क्रिकेट खेला, हालाँकि उनका आईपीएल करियर कुछ बहुत अधिक सफल नही रहा, कैफ ने 13 जुलाई साल 2018 में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से सन्यास ले लिया, उत्तर प्रदेश के लिये रणजी ट्राफी जीतने वाले कैफ ने आखिरी प्रथम श्रेणी मैच छत्तीसगढ़ के लिये खेला था, उन्होंने सन्यास लेते समय कहा था कि ‘नेटवेस्ट ट्राफी में मिली जीत को 16 साल हो गए हैं और आज मैं संन्यास ले रहा हूं, सन्यास लेते समय कैफ अपने क्रिकेट करियर से निराश भी नजर आये, उन्होंने अपने ट्विटर पेज पर लिखा था कि काश मैं भारत के लिए लंबे समय तक खेल पाता, काश ऐसी व्यवस्था होती जिसमें कोई मुझसे पूछता कि वेस्टइंडीज श्रृंखला में नाबाद 148 रन बनाने के बावजूद वह फिर कोई टेस्ट क्यों नहीं खेला, लेकिन इसके बावजूद कैफ के भारत के लिए खेलने की यादें इतनी सुनहरी है कि भारतीय क्रिकेट उनके नूर से हमेशा रोशन रहेगा

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास लेने के बाद कैफ एक क्रिकेट विश्लेषक और क्रिकेट कमेंटेटर के रूप में अपने जीवन की एक नई पारी की शुरुआत कर चुके हैं, नारद टीवी की टीम उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है

Writer -Aalok Shukla 

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