किसी भी फिल्म पर अगर नजर डालें तो हीरो हीरोइन के किरदार के अलावा सबसे सशक्त किरदार खलनायक का ही होता है. विलेन के पास बुरा होने के बावजूद डाइमेंशन ज़्यादा होते हैं, हीरो से उसकी हार आखिर में ही होती है लेकिन  तब तक वो हीरो को परेशान ही करता रहता है. चाहे महाभारत हो या रामायण, हम दुर्योधन और रावण के किरदारों को कभी नहीं भूल सकते. हीरो बलवान तभी लग सकता है अगर वो ज़ालिम और खतरनाक खलनायक को हरा सके. बॉलीवुड की शुरुआत से लेकर आधुनिक सिनेमा तक बिना खलनायक की फ़िल्में अधूरी सी लगती हैं। सिनेमा के बदलते प्रारूप के साथ-साथ बॉलीवुड में  खलनायकों का स्वरूप भी बदलता रहा।  लेकिन आज हम बात करेंगे 80 और 90 के दशक के उस दौर की जब विलेन यानि की खलनायक कुछ ज्यादा ही खतरनाक हुआ करते थे. तो दोस्तों आज के इस एपिसोड में हम आप लोगों को रूबरू कराएँगे 80 और 90 के दशक के पांच ऐसे ही खतरनाक खलनायकों के निजी जीवन और उनके फ़िल्मी करियर से  साथ ही साथ ये भी जानेंगे की अब वो क्या कर रहे हैं।

 

इस लिस्ट में हमारे  पहले  नंबर पर है-

गुलशन ग्रोवर-

बॉलीवुड में बैडमैन के नाम  से मशहूर अभिनेता गुलशन ग्रोवर बॉलीवुड के सबसे खतरनाक खलनायकों में से एक हैं.

गुलशन ग्रोवर का जन्म 21 सितंबर 1955 को  दिल्ली में हुआ था.

इन्होने  अपनी प्रारंभिक शिक्षा  दिल्ली से ही संपन्न की .उसके बाद   श्रीराम कालेज से  कॉमर्स की पढाई करने लगे .

ये वही दौर था जब दिल्ली में रामलीला का चलन ज़ोरो शोरो से था .लगभग हर मोहल्ले में रामलीला का मंचन किया जाता था .गुलशन के पिता जी भी रामलीला का हिस्सा बनते थे और रामलीला के लिए संवाद भी लिखते  थे . गुलशन ग्रोवर भी बचपन में रामलीला के मंच पर छोटे वानर का किरदार निभाया और तब से इनकी दिलचस्पी अभिनय की तरफ होती चली गयी .

ये अपने स्कूल और कॉलेज में होने वाले ड्रामा कप्म्पटीशन में भी हिस्सा लिया करते थे .दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स से इन्होने कॉमर्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया .

साथ ही साथ ये  दिल्ली के ही  लिटिल थिएटर ग्रुप से जुड़े जहाँ इन्होने  कई नाटकों में काम किया.

अब दिल्ली में ही रहकर सब कुछ तो होने वाला था नहीं अगर बॉलीवुड में कदम रखना है तो मुंबई जाना ही पड़ेगा ये सोचकर इन्होने अपने पिता जी से दो महीने की मोहलत मांगी और मायानगरी मुंबई की तरफ रुख कर गए .एक्टिंग तो इन्हे बखूबी आती थी लेकिन अगर फिल्मों में काम पाना है तो इसकी विधिवत ट्रेनिंग भी लेनी पड़ती है अतः इन्होने रोशन तनेजा के एक्टिंग स्कूल में दाखिला ले लिया .

रोशन तनेजा ने जब इनकी प्रतिभा देखि तो इन्होने गुलशन को   एक्टिंग सिखाने के लिए असिस्टेंट टीचर के तौर पर नियुक्त कर लिया .जहाँ पर इन्होने गोविंदा , संजय दत्त ,कुमार गौरव जैसे अभिनेताओं को एक्टिंग की ट्रेनिंग दी .वो  80 के दशक की शुरुआत थी .एक बार उसी  एक्टिंग इंस्टिट्यूट में मशहूर फिल्म प्रोड्यूसर सुरेंद्र कपूर आये हुए थे . जहाँ पर वो गुलशन ग्रोवर की अभियनय क्षमता से काफी प्रभावित हुए  .सुरेंद्र कपूर ने उन्हें अपनी फिल्म हम पांच में काम करने का मौका भी दिया .

इस फिल्म में इनके महावीर नाम का छोटा सा किरदार दर्शकों ने काफी पसंद किया .बॉलीवुड के दरवाजे अब इनके लिए खुल चुके थे.

1983 में  इन्हे फिल्म मिली अवतार इसके बाद तो इनके सामने फिल्मों की झड़ी लग गयी . वो दौर जब खलनायक के रूप में अमरीश पूरी प्राण साहब ,कादर खान  ,डैनी जैसे दिग्गज अभिनेताओं का बॉलीवुड में बोलबाला था उस समय गुलशन ग्रोवर अपने खाश अंदाज़ के लिए निर्माताओं की नज़र में चढ़ गए .

गुलशन ग्रोवर ने एक से बढ़कर एक गजब अजब गेटअप बदले और अपने नए नए अंदाज से सुपरहिट फिल्में देते रहे.

इन्होने अपनी एक्टिंग से बड़े बड़े अभिनेताओं को टक्कर दी फिर चाहे वो  धर्मेंद्र हो या फिर मिथुन चक्रवर्ती.

बॉलीवुड में तो इन्होने अपनी धाक जमाई ही साथ ही साथ हॉलीवुड की भी कई फिल्मों में इन्होने यादगार रोलर किये .

गुलशन ग्रोवर के निजी ज़िंदगी की बात करें  इनकी शादी 1998 हुई में हुई फिलोमिना से.  लेकिन ये  शादी बस 3 साल ही चली और 2001 में दोनों का  तलाक हो गया इस शादी से दोनों का एक बेटा भी है संजय ग्रोवर.

अपनी पहली शादी के तलाक के बाद गुलशन ने उसी साल दूसरी शादी भी कर ली  लेकिन यह शादी भी नहीं टिक पाई और दोनों अलग हो गए.

आज के समय में गुलशन ग्रोवर अपने बेटे संजय ग्रोवर के साथ शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं. आने वाले समय में इनकी कई फ़िल्में भी रिलीज़ होंगी .

2 .इस लिस्ट में हमारे दूसरे  नंबर पर है 90 के दशक में सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले खलनायक

मुकेश ऋषि

 

मुकेश ऋषि ने मुख्य रूप से हिंदी फिल्मों में काम  किया है लेकिन मुकेश काफी समय से   दक्षिणी भारत की फिल्मों में सक्रिय हैं और आज साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री का जाना माना नाम हैं .इन्होने मलयालम, पंजाबी और तमिल तेलुगु, की कई फिल्मों में काम किया है.

मुकेश ऋषि का जन्म सतवारी जम्मू में 19 अप्रैल 1956 को एक गुर्जर समुदाय में हुआ था .मुकेश ऋषि  ग्रेजुएशन करने के बाद जॉब करने फिजी चले गए .जहाँ पर इन्होने 2 सालों तक काम किया . फिजी में ही इनकी मुलाकात केशनी से हुई और दोनों ने शादी कर ली . शादी  करने के बाद ये जॉब के ही सिलसिले में इंग्लॅण्ड चले गए .अपने खाली समय में मुकेश मॉडलिंग भी किया करते थे .

परंतु अधिक काम के कारण वह उस समय मॉडलिंग को अधिक समय नहीं दे पा रहे थे मुकेश ऋषि अब अपने मॉडलिंग के माध्यम से ही अपने जीवन में कुछ करना चाह रहे थे इसलिए उन्होंने फैसला किया की अब चलना है और न्यूजीलैंड में 7 साल रहने के बाद वह फिर से मुंबई आ गए अब मुकेश ऋषि अपना पूरा समय अपनी मॉडलिंग में ही देने लगे धीरे-धीरे मुकेश ऋषि का एक्टिंग की तरफ भी झुकाव  होने लगा और इसी बात को देखते हुए मुकेश ऋषि ने एक्टिंग सीखने का फैसला किया .मुंबई के रोशन तनेजा एक्टिंग स्कूल से  एक्टिंग की बारीकियां सीखने के बाद 1990 में इन्हे सनी देओल की घायल में मेन विलेन डैनी के एक  गुर्गे के किरदार करने का मौका मिला .फिल्म मेन इनके भयानक हुलिए और जबरदस्त एक्टिंग को दर्शकों ने काफी सराहा .इसके बाद लगातार कई फिल्मों मेन इन्होने अपनी खलनायक वाली छवि को ज़िंदा किया .साथ ही साथ कुछ ऐसी फ़िल्में भी की जिनमें इनका पॉजिटिव किरदार रहा .

गुंडा,लाल बादशाह सूर्यवंशम  अर्जुन पंडित, ज्वालामुखी, कुरुक्षेत्र, जैसी फ़िल्में मुकेश की बेहतरीन अभिनय का नमूना हैं .

मुकेश ऋषि ने हिंदी फिल्मों के साथ साथ तमिल ,तेलुगू ,पंजाबी और भोजपुरी भाषा की कई फिल्मों में काम किया है.और अब वो समय है जब मुकेश साउथ की हर तीसरी फिल्म का हिस्सा होते हैं .

3. इस लिस्ट में हमारे तीसरे नंबर पर हैं

दिलीप ताहिल-

90 के दशक  की फिल्मों के मशहूर खलनायकों में दीलिप ताहिल का भी नाम आता है .न सिर्फ खलनायक बल्कि और भी कई चरित्र भूमिकाओं में दर्शकों ने इन्हे काफी पसंद किया .

अपने  अभिनय  से  सभी किरदारों में जान डाल देने वाले  दिलीप ताहिल का जन्म 30 अक्टूबर 1952 को उत्तर प्रदेश के शहर आगरा में हुआ था.चूँकि इनके पिता एयर फाॅर्स में एक अफसर थे इसलिए उनके तबादलों के साथ साथ दीलिप को भी भारत के कई शहरों में रहने का मौका मिला .इन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई लिखाई शेरवुड कॉलेज नैनीताल से संपन्न की .उसके बाद  दिलीप  ने सेंट जेवियर्स कॉलेज मुंबई से स्नातक किया अपने कॉलेज के समय से ही दिलीप ताहिल को एक्टिंग का कीड़ा लग गया था.

इन्होंने अपने स्कूल कॉलेज के दिनों में कई नाटकों में भी हिस्सा लिया लेकिन इस बात का इन्हे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि यह छोटे-मोटे नाटकों में काम करके मैं एक दिन बॉलीवुड का नमी विलेन बन जाऊंगा .

स्कूल के दिनों में इन्होने  लगातार 2 वर्षों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए प्रतिष्ठित कैंडल कप जीता.

दीलिप ताहिल को 1969 में शेरवुड कॉलेज में अंतिम वर्ष में रिकॉर्ड तीसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित किया गया उसके बाद दलीप ताहिल अपने परिवार के साथ मुंबई चले गए और वहां थिएटर ग्रुप बांबे में शामिल हो गए.

थिएटर ग्रुप में इन्होंने कई नाटकों में काम किया निर्देशक श्याम बेनेगल ने कई नाटकों में दलीप ताहिल की गजब की एक्टिंग को नोटिस किया और उन्हें 1974 में अपनी फिल्म अंकुर में एक छोटे से रोल की पेशकश की लेकिन इस छोटे से करैक्टर से ही दलिप ताहिल ने सबको हैरान कर दिया और उन्होंने बता दिया मैं भी किसी फिल्मी एक्टर से कम नहीं हूं इसके बाद दलिप ताहिल हिंदी फिल्मों के मशहूर निर्देशक रमेश सिप्पी की फिल्म शान में नजर आए .उसके बाद दीलिप की गाड़ी चल पड़ी फिर इन्होने  बॉलीवुड की कई फिल्मों में काम किया जिनमें अर्थ, आग और शोला ,कयामत से कयामत तक,राम लखन ,त्रिदेव ,थानेदार, दीवाना ,आदमी खिलौना है, सुहाग ,राजा ,बाजीगर ,जैसी बड़ी हिट फिल्में शामिल है.

न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि हॉलीवुड की भी कई फिल्मों में दीलिप ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया .

दिलीप ताहिल ने बदलते वक्त के साथ भी कई फिल्मों में काम किया जिनमें पार्टनर,जिंदगी तेरे नाम, भाग मिल्खा भाग, इंटरटेनमेंट ,सलाम मुंबई, और 2019 में रिलीज फिल्म मिशन मंगल शामिल हैं .दिलीप ताहिल का सिनेमा सफर काफी शानदार रहा उसके बाद उन्होंने टेलीविजन में भी काम किया 2014 में राज्यसभा टीवी के टेलीविशन श्रृंखला संविधान  में इन्होने पंडित जवाहरलाल नेहरू की भूमिका निभाई थी .

टीवी सीरियल सिया के राम में राजा दशरथ की भूमिका निभाई.इसके साथ ही  दिलीप ताहिल ने संजय खान के धारावाहिक दि सोर्ड आफ टीपू सुल्तान में भी काम किया.

दिलीप ताहिल अब भी अपनी एक्टिंग को लेकर सक्रिय है अभी हाल ही में आयी फिल्म दरबार में भी इन्होने काम किया है . अगर बात करें इनके निजी जीवन की तो इनकी शादी हुई अमृता से इस शादी से इनका एक बेटा है ध्रुव ताहिल .

 

 

4 .इस क्रम में चौथे नंबर पर हैं-

आशीष विद्यार्थी-

आशीष विद्यार्थी को मुख्य रूप से तमिल, कन्नड़ ,मलयालम, तेलुगू, हिंदी, भोजपुरी ,बंगाली व मराठी सिनेमा में अपने अभिनय के लिए जाना जाता है.आशीष विद्यार्थी का जन्म  केरल के कन्नूर  में 19 जून 1962 को हुआ था .आशीष ने शिव निकेतन स्कूल हेली रोड नई दिल्ली से अपनी शुरूआती पढ़ाई की इसके  बाद वह भारतीय विद्या भवन कस्तूरबा गांधी नई दिल्ली से इंटरमीडिएट करने  1983 में आशीष ने हिंदू कॉलेज से  इतिहास की पढ़ाई की.

और इसी हिंदू कॉलेज में इन्होने  थिएटर में प्रवेश लिया. जिस समूह में आशीष विद्यार्थी शामिल हुए उस समूह  को सांभा कहा जाता था जो नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के पूर्व छात्रों द्वारा चलाया जाता है था.1986 में आशीष विद्यार्थी को एक कन्नड़ फिल्म आनंद में एक छोटा सा रोल मिला .

1990 तक ये एनएसडी से जुड़े रहे .1991 में इन्होने एक आर्ट फिल्म काल संध्या में एक पुलिस वाले की भूमिका निभाई .

उसके बाद 1993 में आशीष विद्यार्थी मुंबई चले गए जहाँ आशीष को  सरदार बल्लभ भाई पटेल के जीवन पर आधारित  फिल्म सरदार में बीपी मेनन की भूमिका निभाने का मौका मिला .1993 में ही इन्हे मैंन  स्ट्रीम सिनेमा में आने का मौका मिला और इन्हे फिल्म मिली 1942 aलव स्टोरी.

1994  में  इनकी फिल्म आयी द्रोहकाल जिसमें  सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए इन्होने  राष्ट्रीय अवार्ड भी जीता .

आशीष विद्यार्थी को 1996 में आई फिल्म क्या बात है के लिए एक नकारात्मक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए स्टार स्क्रीन अवार्ड मिला

इन्होने  हिंदी भाषा की कई फिल्मों में काम किया जिनमें जीत ,जिद्दी ,अर्जुन पंडित, जानवर ,कहो ना प्यार है, चोर मचाए शोर, क्या यही प्यार है ,जैसी फिल्में शामिल है.

आशीष विद्यार्थी दक्षिणी भारत के थे इसीलिए इन्होंने तमिल और तेलुगू भाषा की सुपरहिट फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया.

आशीष विद्यार्थी आज भी अपनी एक्टिंग को लेकर सक्रिय है और तमिल ,तेलुगू भाषा की फिल्मों में जबरदस्त एक्टिंग कर रहे हैं.

5   इस लिस्ट में हमारे पांचवें नंबर पर हैं-

रज़ा मुराद-

अपनी भारी-भरकम आवाज और दमदार अभिनय के दम पर बॉलीवुड में एक खाश मुकाम बनाने वाले

रज़ा  मुराद का जन्म 23 नवंबर 1950 को मुंबई मे हुआ था .इनका पैतृक निवास उत्तर प्रदेश के रामपुर में  था .और इनकी शुरूआती पढाई भी रामपुर से ही हुई .आगे की पढाई इन्होने अपने ननिहाल भोपाल से पूरी की .इनके पिता जी मुराद भी एक जाने माने अभिनेता थे .अपने पिता को फिल्मों में काम करता देख इनके मन में भी फिल्मों में काम करने की इक्षा हुई .तब इनके पिता जी ने इन्हे अभियनय में प्रशिक्षण लेने की बात कही और इन्होने ऍफ़ टी आई आई ज्वाइन कर लिया .

रजा मुराद ने 1969 से 1971 तक अभियनय का विधिवत प्रशिक्षाःन लेने के बाद 1972 में  इन्हे बी . आर . इशारा की फिल्म एक नज़र में काम करने का मौका मिल गया जिसमें अपने बेहतरीन अभियनय से रज़ा मुराद लोगों की नज़र में आ गए .फिल्म एक नज़र के लिए इन्हे एक मैगज़ीन की तरफ से बेस्ट डेब्युए एक्टर का अवार्ड भी मिला .इनके अभिनय से प्रभावित होकर हृषिकेश मुखर्जी ने इन्हे अपनी फिल्म नमक हराम में साइन किया .फिल्म नमक हराम में एक शराबी शायर की भूमिका में रज़ा साहब कुछ इस तरह जमे की दर्शक आज भी इन्हे इस किरदार के लिए याद करते हैं .लेकिन इतनी जबरदस्त अभियनय का परचम लहराने के बाद भी रज़ा मुराद इंडस्ट्री में संघर्ष करते रहे .लगातार 7 सालों तक इन्हे कोई काम नहीं मिला तब ताका रज़ा साहब फिल्मों में काम करने का सपना भी छोड़ चुके थे .1982 में जब राज कपूर साहब फिल्म प्रेम रोग बनाने लगे तो उन्होंने अपने अस्सिटेंट से कहा की जाओ उस लड़के को ढूंढकर लाओ जिसने हृषिकेश जी की फिल्म में शराबी शायर की भूमिका निभाई थी .रज़ा साहब को लाया गया और फिल्म प्रेम रोग में इन्हे किरदार मिला एक विलेन का . रज़ा साहब की इस दूसरी पारी ने इनके करिअर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया .80 के दशक की कई हिट फिल्मों में ये बतौर विलेन नज़र आये .सिनेमा के बदलते दौर में भी इन्होने यादगार भूमिककाएं की .

रज़ा   मुराद  को  खलनायक  भूमिका लिए  सात  बार फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया जिसमें एक बार ये इस अवार्ड को अपने नाम कर चुके हैं . अगर रजा मुराद  के निजी जीवन की बात करें तो इनकी शादी हुई  समीना मुराद  सेइस शादी से इनकी 2 संताने है एक बेटा अली मुराद और एक बेटी आयशा मुराद आज रजा मुराद अपने परिवार के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं .

Writer-Anurag Suryavanshi ( Chief Editor / Founder Of Naarad TV )

 

 

 

 

 

 

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