हवाई जहाज किस प्रकार ऊपर उठता है ? 

 अगर  आपने  पतंग उडाई होगी तो आप  जानते होंगे कि जब पतंग हवा के खिलाफ खींचते हो तो पतंग हवा में ऊपर जाती है । ( कारण यह है कि ) ऊपर धक्का मारती हुई हवा का दबाव उसे ऊपर उठा देता है । इसी प्रकार हवाई जहाज भी हवा में ऊपर उठता है ।
ग्लाइडर्स 
हवाई जहाज का आविष्कार करने की दिशा में सबसे पहला । पग एक अंग्रेज वैज्ञानिक जॉर्ज कैले ने उठाया था । उसने म्लाइडर का आविष्कार किया । म्लाइडर एक । मशीन होती है जिसमें हवाई जहाज जैसे बड़े – बड़े तथा चौड़े पंख होते हैं । किन्तु उसमें इंजन नहीं होता । । अगर एक ग्लाइडर को किसी ऊँचे बिन्द जैसे कि पहाड़ की चोटी से ऊपर हवा में धकेला जाये , तो वह । नीचे के पंखों से टकराने वाली हवा के दबाव के कारण ऊपर ही बना रहता है । वह सीधा नहीं गिरता । बल्कि धीरे – धीरे हवा में फिसलता हआ जमीन पर उतरता है । अगर म्लाइडर बड़ा और मजबूत हो , तो  उसके उड़ते समय आदमी उससे लटक सकता है और इस प्रकार सैकड़ों गज यात्रा कर सकता है।
कैले
 
कैले ने अपना पहला म्लाइडर सन् 1804 में बनाया था । उसने । यह भविष्यवाणी की थी कि अगर एक उपयुक्त इंजन बन जाय जो प्रोपैलर को चला सके तो ग्लाइडर को एक उड़ने वाली मशीन में बदला जा सकता है । किन्तु उस समय तक केवल भाप के इंजन का ही पता था , जो बहुत मारी होता था । अत : जितनी भी ‘ उड़ने वाली मशीनों ‘ में भाप का इंजन लगाया गया वे सब असफल ही रहीं । एयरशिप की तरह हवाई जहाज का आविष्कार भी केवल तभी सम्भव हो पाया जब पेट्रोल इंजन का आविष्कार हो गया ।
लिलियनथाल का ग्लाइडर 
ग्लाइडर से सम्बन्धित प्रयोग निरन्तर चल रहे थे । सन् 1891 में एक जर्मन इंजीनियर ओटो लिलियनथाल ने एक नये प्रकार का ग्लाइडर बनाया । इसमें चमगादड़ जैसे पंख थे । यह लकड़ी और कैनवास ( किरमिच ) का बना । हुआ था । इसके बीचों – बीच चमड़े फीते थे , जिसपर पर ग्लाइडर के उड़ते समय लिलियनथाल लटक सकता था । इस प्रकार 5 वर्ष में लि . लेयनथाल ने दो हजार से अधिक उड़ाने की । वह एक बार में एक हजार फीट की दूरी उड़ सकता था । बर्लिन नगर के पास एक सौ फीट ऊँची पहाड़ी थी । वहाँ से वह अपनी उड़ानें भरा करता था । सन् 1896 में अगस्त में एक दिन प्रभात के समय उसके म्लाइडर का सन्तुलन बिगड़ गया और वह जमीन से टकरा गया। जब लिलियनथाल मर रहा था तो उसने कहा , ‘ बलिदान तो करने ही होते हैं ।
राइट बन्धुओं का कार्य 
 डेटेन ( ओहाइयो ) अमेरिका के साइकिल बनाने वाले बन्धु ओरवील तथा बिल्बर राइट उड़ने में हमेशा रुचि लेते रहे थे । अन्य अनेक आविष्कारों की तरह वे भी उड़न मशीन बनाने के सपने देख रहे थे । उन्होंने ओटो लिलियनवाल के ग्लाइडर के प्रयोग के बार में सना । उनकी मत्य पर उन्होंने उड़ने वाली मशीन बनाने का और भी अधिक दृढ निश्चय कर लिया ।
पहले वे म्लाइडर्स उड़ाने का कुछ अनुभव प्राप्त कर लेना चाहते थे । उन्होंने ग्लाइडर्स के बारे में अभी तक जो कुछ भी लिखा था , उसका गहन अध्ययन किया । उन्होने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिया कि अभी तक के आविष्कारकों ने क्या गलतियों की थी और उनसे  बचने की केटा की । तीन वर्ष के अध्ययन और प्रयोग – के उपरान्त उन्होंने सन् 1900 में एक बड़ा ग्लाइडर बनाया जो मनुष्य को ले जा सकता था । अपने प्रयोग के लिए उन्होंने एक समुद्री किनारा चुना । जिसका नाम ‘ Kitty Hawk ‘ था । यह एक ऐसा स्थान था जहाँ लगातार समुद्र की ओर से हवा चलती रहती थी । राइट बन्धुओं ने इस बात का अध्ययन किया कि हवा की धाराओं का म्लाइडर की उड़ानों पर क्या प्रभाव पड़ता है । इस अध्ययन के आधार पर उन्होंने एक अच्छा स्लाइडर बनाया । अगली गर्मी मेंवे फिर ‘ Kitty Hawk ‘ आये और नये gliders के साथ प्रयोग किये ।
अपने अध्ययन को और अधिक आगे बढ़ाने के लिये उन्होंने अपने कारखाने में एक ‘ wind tunnel ‘ (हवा की सुरंग ) बनाली । यह wind tunnel एक tube थी जिसमें होकर एक पंखे द्वारा हवा की धारा प्रवाहित की जाती थी । पंखा भित्र – भित्र गतियों से घूम सकता था और ट्यूब में होकर भित्र – भित्र शक्ति की हवाई धारायें प्रवाहित कर सकता था । इस धारा के द्वारा ग्लाइडर्स के छोटे – छोटे मौडिल्स उड़ाकर प्रयोग किया जा सकता था और यह देखा जा सकता था कि अलग – अलग शक्ल के पंखों में क्या लाभ या हानि रहती है । अपने ‘ wind tunnel ‘ के इन प्रयोगों से राइट बन्धुओं ने उड़न विद्या के विषय में कुछ सही निरीक्षण किये ।
अन्त में जब उन्हें ग्लाइडर्स के बारे में पर्याप्त ज्ञान हो गया तब । उन्होंने अपना ध्यान उड़न मशीन की ओर लगाया । सौभाग्य से उस समय तक पेट्रोल इंजन का आविकार हो गया था किन्तु उन्हें कोई ऐसा इंजन नहीं मिला जो हल्का भी हो और शक्तिशाली भी । इसलिए उन्होंने स्वयं ही अपना एक इंजन विकसित करने का निर्णय किया । यह काम उन्होंने अपने कारखानों में ही किया । राइट बन्धुओं का जलज उनकी उड़न विधा के विषय में कुछ सही निरिक्षण किये।
राइट बन्धुओं का जहाज
  दिसम्बर सन 1903 में उनकी उड़न । मशीन ‘ Kitty Hawk ‘ समुद्री तट पर उड़ने के लिए तैयार करके रखी गई । एक ढालू स्थान पर एक रेल की पटरी बिछाई गयी और उड़न मशीन को उस पटरी पर रखा गया । यह उड़न मशीन एक हवाई जहाज था। जिसमें एक – दूसरे के ऊपर दो पंख थे । हर पंख 40 फीट लम्बा था और दोनों पंखों के बीच में 6 फीट का फासला था । इंजन नीचे के पंख के बीच में दाहिनी ओर लगाया गया । चलाने वाले को मशीन का सन्तुलन ठीक रखने के लिये बीच से बायीं ओर पेट के बल लेटना पड़ता था ।
ओरवील की पहली उड़ान 
7 दिसम्बर , 1903 को सुबह के समय समुद्र की ओर से तेज ठण्डी हवा चल रही थी ( जबकि ओरवील ने । अपनी प्रथम उड़ान ली ) , केवल चार पुरुष और एक लड़का इस महान घटना को देखने आ रहे थे । ओरवील अपनी मशीन पर चढ़ गया और पेट के बल लेट गया । उसने इंजन को चालू कर दिया और थोड़ी देर तक उसे गर्म होने के लिए चलने दिया । फिर ओरवील ने वह तार हटा दिया जो मशीन को पटरी से बाँधे हुआ था और हवाई जहाज तेजी से हवा में उठने लगा । बिल्बर थोड़ी देर तक उसके साथ दौड़ा । वह पंख को पकड़े हुये था । पटरी पर 40 फीट चलने के बाद हवाई जहाज उठ गया । यह उड़ान एक सी नहीं थी । हवा धक्के मारकर हवाई जहाज को कभी ऊँचा कभी नीचा कर देती । 12 सेकिण्ड हवा में रहने के बाद हवाई जहाज जिस बिन्दु से उड़ा था वहाँ से 120 फीट आगे उतर गया ।
यह एक छोटी ही उड़ान थी । किन्तु उड़न विद्या के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण पहली बार ऐसा हुआ था कि हवा से अधिक भारी मशीन मनुष्य को लेकर अपनी ही शक्ति से हवा में उड़ी थी।
समाचार पत्रों का रुख 
 पर आश्चर्य की बात है कि राइट  बन्धुओं की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का समाचार किसी बड़े अखबार ने प्रकाशित नहीं किया क्योंकि उन्हें  यह विश्वास नहीं हुआ कि यह खबर सच है । केवल एक छोटे नगर के अखबार ने इस कहानी को छापा  राइट बन्धुओं ने अमेरिका सरकार को लिखा और उन्हें अपना आविष्कार भेंट करना चाहा किन्तु । – अमेरिका की सरकार ने भी उनकी बात पर कोई ध्यान ही नहीं दिया । उन्हें भी राइट बन्धुओं की बात का विश्वास नहीं हुआ। फिर भी राइट बन्धु धैर्यपूर्वक अपने हवाई जहाज में सुधार करते रहे। सन 1905 तक उनके हवाई जहाज में इतना सुधार हो गया कि वह एक बार में आधे घन्ट  तक उड़ सकता था और 25 मील तक जा सकता था । मान्यता की प्राप्ति – सन 1908 में उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन फ्रांस में किया । फ्रांस में जैसे ही । उनकी मशीन ने पहली उड़ान ली वैसे ही बिल्बर को प्रशंसा करने वाली भीड़ ने घेर लिया ।
फ्रांस में जैसे ही उनकी मशीन ने पहली उड़ान ली वैसे ही बिल्बर को प्रशंसा करने वाली भीड़ ने घेर लिया । फ्रांस में उनको जो प्रसिद्धि मिली , उसने अमेरिका सरकार की भी आँखें खोल दी । अमेरिकन सरकार की प्रार्थना पर ओरविल ने सरकारी पदाधिकारियों और अखबार वालों के सामने अपने हवाई जहाज को उड़ाकर दिखाया । जैसे ही हवाई जहाज ने भूमि को छोड़ा , भीड़ उत्तेजना से पागल हो गयी । कुछ ही समय में पश्चिम के लगभग हर देश में हवाई जहाज बनने लगे । हवाई जहाजों का प्रारम्भ हो गया ।
 ***लेखक – मोहित दुबे*** 
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