जैकी श्रॉफ के संघर्ष की कहानी

नमस्कार स्वागत है आप सब का नारद टीवी पर , दोस्तों कहते है हालात चाहे कितने भी बुरे क्यों ना हो, ज़िंदगी में एक पड़ाव ऐसा आता है, जो आपको रातों रात कामयाब इंसान बना देता है.लेकिन वो पडाव वो कामयाबी अचानक नहीं मिलती उसके पीछे छुपा होता है वर्षों का संघर्ष .बॉलीवुड ,चकाचौध की ऐसी दुनिया जहाँ अधिकतर लोग दौलत -शोहरत  कमाने के लिए जाना चाहतें हैं.परदे पर चमकते किसी सितारे को देखने के बाद यही मन करता है की काश ये रुतबा हमारे पास भी होता .लेकिन अगर आप सोचते हैं कि पर्दे पर चमकते सितारे की जिंदगी हमेशा से ऐसी ही रोशन थी तो आप गलत हैं. आज हम आप लोगों को एक ऐसे सितारे की कहानी सुनाने जा रहे हैं जिसने  अपने जीवन के शुरूआती दिनों में भयंकर कठिनाइयां झेली , जिसने मुंबई के सड़कों की धूल फांकी लेकिन अपने जूनून को कभी कम नहीं होने दिया और आखिर एक दिन बन बैठा बॉलीवुड का सुपरस्टार .जी हाँ हम बात कर रहे हैं – जयकिशन ,उर्फ़ जग्गू दादा, उर्फ़ जैकी श्रॉफ की .

जाकिशन से जग्गू दादा और फिर जैकी श्रॉफ इन तीन पड़ावों में ऐसी कहानियां छुपी हैं जो आपके अंदर एक नया जोश पैदा करेंगी ताकि आप भी अपने सपनो को पूरा करने के लिए दोगुनी गति से मेहनत करें .

जयकिशन काकूभाई  श्रॉफ का जन्म 1 फ़रवरी 1957 को  एक गुजराती परिवार में महराष्ट्र के उदगीर में  हुआ था ! पिता काकूभाई  व माता रीता श्रॉफ .इनकी माँ दरअसल कज़ाकिस्तान से थीं जहाँ से उन्होंने पहले दिल्ली फिर मुंबई  की तरफ रुख किया . मुंबई में इनकी मुलाकात जैकी श्रॉफ के पिता यानि काकूभाई से हुई और दोनों ने शादी कर ली .इनके पिता जी एक व्यवसायिक घराने से तालुकात रखते थे लेकिन  उनसे   बिज़नेस में नुकसान होने की वजह से उनके पिता जी ने उन्हें घर से निकल दिया था . श्रॉफ के पिता काकूभाई एक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य थे. जिन्होंने जैकी के बचपन में एक भविष्यवाणी की थी कि जैकी बड़ा होकर एक बड़ा स्टार बनेगा.लेकिन जैकी का सपना बचपन में कुछ अलग था जैकी बचपन में एक बेहतरीन कुक बनना चाहते थे. जैकी श्रॉफ जब मात्र दस साल के थे तो इन्होने अपने बड़े  भाई की मौत देखी और इस घटना ने इन्हे अंदर से हिला कर रख दिया .बचपन बहुत ही मुफलिसी में बीता. गरीबी का आलम ये था की जब ये ग्यारहवीं में थे इन्हे अपनी पढाई बीच में ही छोड़ देनी पड़ी .

और फिर ये रोज़ी -रोटी की तलाश में मुंबई  की सड़कों पर भटकने लगे . मूंगफली बेचीं , ट्रक चलाया और भी छोटे -मोटे काम किये लेकिन ये अपने पिता जी की बात नहीं भूल पाए थे की जैकी बड़ा होकर एक स्टार बनेगा . मुंबई के तेज़ होटल में शेफ के अपरेंटिस और एयर इंडिया में फ्लाइट अटेंडेंस के लिए भी आवेदन किया लेकिन कम पढ़े लिखे होने की वजह से इन्हे इन दोनों जगहों से ही निराशा मिली .कुछ दिनों बाद इन्हे ट्रेड विंग्स नाम की एक लोकल टॉवेल कंपनी में ट्रेवल एजेंट का काम मिल गया .जैकी श्रॉफ बचपन से ही बड़े दरियादिल थे .वो हमेशा मुंबई के झुग्गी झोपड़ी में रहने वालों की मदद किया करते थे किसी को को कोई तकलीफ होती तो वो जाकिशन के पास आया करते थे और जयकिशन भी उनकी भरपूर मदद किया करते थे .इस तरह मुंबई के झुग्गी झोपड़ी वालों ने ही उन्हें प्यार से जग्गू दादा कहना शुरू कर दिया .इसी बीच उन्हें एक विज्ञापन कंपनी से मॉडलिंग का ऑफर मिला . जैकीश्रॉफ तैयार हो गए ,काम के पैसे भी मिले तो इनकी दिलचस्पी मॉडलिंग की तरफ और बढ़ी वो 80 के दशक की शुरुआत थी इन्होने चार मीनार सिगरेट जैसे प्रोडक्ट के लिए भी विज्ञापन किया आपको बता दें की तब वो विज्ञापन पेपर में छपा करते थे . कई लोगों ने इन्हे सलाह दी की तुम्हे फिल्मो में भी टॉय करना चाहिए .और इन्हे अपने पिता जी की हुई भविष्यवाणी भी याद आने लगी सो इन्होने एक एक्टिंग क्लास भी ज्वाइन कर ली जहाँ पर इनकी मुलाकात हुई देवानंद के बेटे सुनील आनंद से .सुनील आनद से अच्छी जान पहचान हो जाने के बाद इन्होने उनसे एक दिन ये रेक़ुएस्ट की, की उन्हें देवानंद से मिलवा दें . देवानंद से उनकी मुलाकात सफल रही और उन्होंने जैकी को अपनी फिल्म स्वामी दादा में काम करने का मौका दे दिया .आपको बता दें की स्वामी दादा 1982 में रिलीज़ हुई थी और इस फिल्म में देवानंद खुद मुख्य भूमिका में थे इसके अलावां मिथुन चक्रवर्ती ,नसीरूदीन शाह , पद्मिन कोल्हापुरी आदि सितारे भी इसमें शामिल थे. स्वामी दादा कुछ खास सफल तो नहीं रही लेकिन इसके बाद बॉलीवुड के दरवाजे जैकी श्रॉफ के लिए खुल गए . इनपर नज़र पड़ी शुभाष  घई की. शुभाष घई ने 1983 में इनको लेकर फिल्म हीरो बनायीं .फिल्म “हीरो” में जैकी श्रॉफ का नाम “जैकी” रखा था। तब से  ये जयकिशन काकुभाई से जैकी श्राफ बन गए। हीरो फिल्म उस समय की  हिट फिल्म थी। हीरो की सफलत ने जैकी श्रॉफ को रातों रात स्टार बना दिया .फिल्म हिट होने के बाद जैकी की”अंदर बाहर”, “युद्ध” और “जुनून” जैसी फिल्में आईं और बॉक्स आफिस पर सफल साबित हुईं।1986 में आई फिल्म कर्मा साल की सबसे ज्यादा कमाई वाली फिल्म बनी। जैकी श्राफ की फिल्म किंग अंकल और अल्लाह रखा भी आई। लेकिन इन फिल्मों में निर्माता के लिए पहली पसंद अमिताभ बच्चन थे बाद में ये फिल्में जैकी की झोली में आ गिरीं। 1990 में आई परिंदा ने उनकी रील लाइफ में चार चांद लगा दिए। इस फिल्म में इन्हें बेस्ट एक्टर के लिए फिल्म “फेयर अवॉर्ड” भी मिला।

1990 में परिंदा फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार, 1995 में फिल्म 1942 ए लव स्टोरी के लिए सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता का पुरस्कार तथा  1996 में इन्हे फिल्म रंगीला के लिए सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता का पुरस्कार मिला ,फिल्म ‘खलनायक’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बेस्ट  एक्टर के तौर पर नोमिनेशन मिला. 2007 में भारतीय सिनेमा में उत्कृष्ठ योगदान के लिए जूरी अवार्ड भी मिला. इसके अलावा भी उन्हें कई  पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है . राम-लखन, वर्दी, दूध का कर्ज, खलनायक जैसी दर्जनों भर यादगार फ़िल्में देने वाले जैकी श्रॉफ का 2019 में वेब सीरीज क्रिमिनल जस्टिक में नया अवतार देखने को मिला इसमें इनके मुस्तफा की भूमिका ने लोगों का दिल जीत लिया .

बात करें इनके निजी ज़िंदगी की तो  जैकी श्रॉफ ने 1987  में अपनी प्रेमिका आयशा दत्त से शादी की . इस शादी से इन्हे दो बच्चे हुए बेटा टाइगर और  बेटी कृष्णा .

परदे पर जैकी श्रॉफ का जादू अब भी बरक़रार है हम इनके स्वस्थ्य और दीर्घायु जीवन की कामना करतें हैं .

Writer-Anurag Suryavanshi ( Chief Editor / Founder Of Naarad TV )

 

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