नमस्कार स्वागत है आप सब का नारद टीवी पर .रफ़ी साहब और किशोर दा, बॉलीवुड संगीत जगत में ये दो ऐसे नाम हैं जिनके नक़्शे कदम पर चलकर ना जाने कितने गायकों ने शोहरत हासिल की .आज के गायक और आने वाले गायकों की पीढ़ियां इन दो नामों को शायद ही भूल पाएं .नारद टीवी पर पिछले दिनों आपने कुछ ऐसे गायकों के बारे में जाना जो किशोर कुमार के नक़्शे कदम पर चलकर बॉलीवुड में प्रसिद्द हुए .सिंगर्स स्पेशल के आज के इस एपिसोड में हम जानेंगे एक ऐसे गायक की कहानी जिन्हे कहा जाता है आधुनिक रफ़ी .सोनू निगम एक ऐसा नाम है जिसने हमारे बचपन और जवानी दोनों में कई रंग भरे हैं। हमने उनके गाए गीतों की बदौलत प्यार करना सीखा, उनके गाए लफ्ज़ों की ब़दौलत ज़िंदगी के फलसफे को जाना, हमने उनको देखकर समझा कि अपने अंदर की सच्चाई क्या होती है और आज भी उनके साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। .एक दौर वो भी था जब हम अपने पसंदीदा गायक की बस आवाज भर ही सुन पाते थे ऐसे में जब सोनू निगम रफ़ी साहब के कवर वर्शन वाले गानों के साथ बॉलीवुड में आये तो बहुत से श्रोताओं ने उस आवाज को रफ़ी साहब की ही आवाज माना.क्यूंकि रफ़ी साहब की आवाज जो सुकून देती है वही सुकून सोनू निगम के आवाज में भी मिलती है  .बस यही एक वजह है की हम सोनू निगम को आधुनिक रफ़ी कहतें हैं .तो आज के एपिसोड में हम जानेंगे सोनू निगम के जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प पहलुओं के बारे में .बॉलीवुड सिंगर्स पर आप हमारे पिछले एपिसोड्स देखना चाहतें हो तो डिस्क्रिप्शन में दिए गए लिंक पर जाकर आप उन  वीडियोस को देख सकते हैं .

सोनू निगम का जन्म 30 जुलाई 1973 में फरीदाबाद के एक कायस्थ परिवार में हुआ था।दरअसल भारत-पाक बंटवारे के बाद सोनू का परिवार भारत आया था, शुरुआत में इनका परिवार रिफ्यूजी के तौर पर  फरीदाबाद के नेशन हट्स में रहता था । बाद में इनका परिवार फरीदाबाद में ही बस गया .सोनू का जन्‍म यहीं पर हुआ, उस जगह एक पीपल का पेड़ था जिसके नीचे सांझा चूल्‍हे के तौर पर एक तंदूर लगता था, इस पर मोहल्‍ले की सभी महिलाएं खाना बनाती थीं और सब बैठकर वहीं खाते थे।
गायकी का हुनर सोनू को यूँ ही नहीं मिला हुआ था बल्कि ये कला उनके माता पिता से उन्हें मिली हुई थी .सोनू निगम के माता पिता भी गायक थे और स्टेज पर गया करते थे .और इस तरह सोनू ने भी महज चार साल की उम्र से स्टेज पर गाना शुरू कर दिया .दरअसल सोनू निगम के माता पिता चाहते थे की सोनू पढ़ लिखकर नौकरी करें और ये नहीं चाहते थे की वो गायकी की दुनिया में अपना करियर बनाये .लेकिन सोनू ने बहुत काम उम्र में ही ये साबित कर दिया की वो बस गायकी के लिए ही बने हुए हैं .सोनू निगम ने एक दिन  स्टेज पर रफ़ी साहब का गीत क्या हुआ तेरा वादा गाया पूरी पब्लिक चार साल के सोनू की आवाज पर झूम उठी उसके बाद तो सोनू निगम के माता पिता को भी मानना पड़ा की सोनू गायकी के लिए बने हैं . अपनी प्रारंभिक पढाई पूरी करके सोनू  अपने पिता के साथ 19 साल की उम्र में  अपने करियर की शुरुआत करने के लिए मुंबई शहर आ गये ।यहां उन्होंने क्लासिकल सिंगर उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान से संगीत का प्रशिक्षण लिया।मुंबई पहुंचने के बाद सोनू निगम का सफर इतना भी आसान नहीं था। पैसे कमाने के लिए वो लगातार स्टेज शोज करते रहे।वो स्टेज प्रोग्राम में अक्सर मोहम्मद रफी साहब के ही  गाने गाते थे। और इस तरह रफ़ी साहब की आवाज इनके अंदर बसती चली गयी .काम के लिए ये स्टूडियो के चक्कर लगाया करते थे .काम का आश्वाशन तो मिलता पर काम नहीं .कई बार ऐसा भी हुआ की म्यूजिक डायरेक्टर इनसे गाना तो गवा लेते लेकिन फाइनल रिकॉर्डिंग किसी दूसरे गायक से करवा लेते  .सोनू निगम की प्रतिभा को नई पहचान दी टी सीरीज के मालिक गुलशन कुमार ने . टी सीरीज ने उनकी आवाज में एलबम ‘रफी की यादें’ लॉन्च किया।रफी साहब की याद में गाए उनके गीत इतने सुंदर थे कि लोग सोनू निगम की आवाज के दीवाने  हो गए . सोनू ने बतौर प्लेबैक सिंगर फिल्मों में अपना करियर डेब्यू किया  फिल्म ‘जानम’ से . लेकिन दुर्भाग्य से  यह फिल्म रिलीज नहीं हो सकी। इस बीच उन्होंने कई बी और सी ग्रेड फिल्मों में गाने गाए।साल 1995 में सोनू निगम ने टीवी शो सारेगामा होस्ट किया।इस शो के बाद सोनू के करियर को एक नई उछाल मिली। इसी बीच  टी सीरीज के मालिक गुलशन कुमार ने इन्हे अपनी  फिल्म ‘बेवफा सनम’ में गाने का मौका दिया।बेवफा सनम के दर्द भरे गानों ने सोनू के करिएर में चार चाँद लगा दिए .कहते हैं सबसे ज़्यादा दर्द इश्क में होता है। खासकर तब जब आपका दिल टूट जाए। यूं तो इंडस्ट्री में बहुत सारे गम के गीत बने जिन्हें सुनकर लोगों की आंखों से आंसू बहे लेकिन सोनू के इन  गानों  की बात ही कुछ और थी। 1995 में आए इन गीतों  के एक-एक लफ्ज़ में दर्द था जिसे सोनू ने पूरे अहसास के साथ गाया।

देशप्रेम हमेशा से भारतवासियों के रग-रग में दौड़ा है। सैनिकों को लेकर सम्मान हमेशा से हमारे मन में रहा लेकिन सैनिकों के दर्द, उनके बलिदान और उनके इमोशन को हमने इस गीत के माध्यम से और करीब से जाना। बार्डर फिल्म का गीत “संदेसे आते हैं” सोनू द्वारा गाया एक और मील का पत्थर था। रूप कुमार राठौड़ के साथ सोनू जब इस गाने की ये लाइन गाते हैं

ऐ गुजरने वाली हवा बता
मेरा इतना काम करेगी क्या
मेरे गाँव जा
मेरे दोस्तों को सलाम दे

तो ऐसा लगता है जैसे वो हवा सच में उनका यह काम कर देगी। उनकी आवाज़ की सच्चाई ने आज भी इस गीत को उतना ही सच्चा बनाए रखा है जितना वो तब था। आज भी इस गीत को सुनकर रौंगटे खड़े हो जाते हैं।

सोनू निगम की खास बात ये है कि उनकी आवाज़ हर तरह के गानों में फिट बैठती है।  फिल्म अग्निपथ में उनका गाया गीत “अभी मुझमें कहीं” अगर किसी और सिंगर द्वारा गाया जाता तो कभी उतना प्रसिद्ध नहीं होता जितना आज है।

आज के वक्त में गाने आते हैं, हम उन्हें चार दिन गुनगनाते हैं और फिर भूल जाते हैं लेकिन सोनू का गाया ये गीत आज भी लोगों की ज़ुबान पर है। यही खासियत होती है एक महान गायक की। वो गाने को अपना बना लेता है।सोनू निगम ने कई अलग-अलग भाषाओं जैसे कि मणिपुरी, गढ़वाली, ओड़‍िया, तमिल, आसामी, पंजाबी, बंगाली, मलयालम, मराठी, तेलुगु और नेपाली आदि भाषा में गाने गाये है। जहँ एक और इनकी आवाज में रफ़ी साहब जैसी गहराई है तो एक और किशोर दा जैसा चुलबुलुना पन भी है कॉमेडी और मिमिक्री में तो ये अच्छे अच्छे कॉमेडियन को पानी पिला देते हैं .

सोनू ने एक्टिंग में भी हाथ आजमाया, उन्होंने साल 1983 के फिल्म बेताब में बतौर चाइल्ड एक्टर काम किया था और उसके बाद बॉलीवुड में उन्होंने बहुत सी फिल्में जैसे लव इन नेपाल’, ‘जानी दुश्मन- एक अनोखी कहानी’ और ‘काश आप हमारे होते’ फिल्मों में अहम भूमिका निभाई लेकिन ये साडी फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हों पायी .

बात करे इनकी निजी ज़िंदगी की तो सोनू की शादी 15 फरवरी 2002 में हुई थी और इनकी पत्नी का नाम मधुरिमा है जो एक बंगाली  परिवार से है। इनका एक बेटा भी है जिसका नाम ‘नीवान’ है।
जैसा की ऐसा लगभग हर गायकों के साथ हुआ एक समय के बाद उनका करियर भी ढलान पर आया लेकिन जो नग्मे सोनू निगम ने अपनी आवाज में हमें दिए हैं वो कभी भुलाये नहीं जा सकते .

Writer-Anurag Suryavanshi ( Chief Editor / Founder Of Naarad TV )

 

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