अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारत-पाकिस्तान जहाजों की टक्कर, विदेश मंत्रालय ने 1991 के समझौते का किया जिक्र
भारत और पाकिस्तान के समुद्री जहाजों के बीच अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हाल ही में एक टक्कर हुई है। इस घटना के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे 1991 के द्विपक्षीय समझौते के अनुच्छेद 10 का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। मंत्रालय ने इस मामले में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए समझौते के नियमों का पालन करने पर जोर दिया है।
VIMARSHNAARAD TVहाल ही में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारत और पाकिस्तान के जहाजों के बीच एक टक्कर की घटना सामने आई है। इस घटना के बाद से दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और प्रोटोकॉल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए इसे गंभीर विषय बताया है।
मंत्रालय के अनुसार, यह घटना साल 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक महत्वपूर्ण समझौते का उल्लंघन है। विशेष रूप से, इस समझौते के अनुच्छेद 10 का हवाला देते हुए भारत ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। यह अनुच्छेद दोनों देशों के जहाजों के संचालन और सुरक्षा से संबंधित नियमों को परिभाषित करता है।
बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि समझौते के तहत निर्धारित नियमों का पालन करना दोनों पक्षों के लिए अनिवार्य है। इस तरह की टक्कर न केवल समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी एक चुनौती पेश करती है।
अनुच्छेद 10 के तहत दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक-दूसरे के जहाजों के साथ व्यवहार करते समय संयम और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होता है। भारत ने इस घटना को इसी समझौते की शर्तों का सीधा उल्लंघन माना है।
फिलहाल इस मामले पर पाकिस्तान की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को लेकर पहले भी कई बार दिशानिर्देश जारी किए गए हैं ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
यह घटना समुद्री सीमाओं पर सुरक्षा के महत्व को फिर से रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादों को सुलझाने के लिए कूटनीतिक चैनलों का उपयोग करना और समझौते की शर्तों का सख्ती से पालन करना ही एकमात्र रास्ता है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस घटना के बाद स्थिति पर नजर बनाए रखी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दोनों देशों के बीच संचार और समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।