अनंत चतुर्दशी 2026: गणेश विसर्जन की तिथि, पूजा का शुभ समय और इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व
वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी का पर्व 25 सितंबर को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन के लिए निर्धारित है। आचार्य मदन मोहन के अनुसार, इस दिन पूजा और विसर्जन के लिए सुबह 6:11 बजे से 11:06 बजे तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है। भक्त इस दिन विशेष अनुष्ठान कर बप्पा को विदाई देते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष स्थान है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में यह पावन तिथि 25 सितंबर को पड़ रही है। इस दिन का मुख्य आकर्षण गणेश विसर्जन है, जो दस दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन करता है। भक्त पूरे हर्षोल्लास के साथ अपने आराध्य को विदाई देते हैं।
आचार्य मदन मोहन ने इस पर्व के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह दिन भगवान विष्णु और गणेश जी की आराधना के लिए समर्पित है। अनंत चतुर्दशी पर की गई पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और विधि-विधान से भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं।
विसर्जन के लिए शुभ समय का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। आचार्य के अनुसार, अनंत चतुर्दशी पर पूजा और विसर्जन के लिए सबसे उपयुक्त समय सुबह 6:11 बजे से लेकर 11:06 बजे तक रहेगा। इस निर्धारित अवधि में अनुष्ठान करना शुभ फलदायी माना जाता है।
गणेश विसर्जन की प्रक्रिया में भक्त बप्पा को अगले वर्ष पुनः आने का निमंत्रण देते हैं। इस दौरान पूरे वातावरण में 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारे गूंजते हैं। विसर्जन के साथ ही गणेश उत्सव के सार्वजनिक आयोजनों का समापन हो जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बांधने की भी परंपरा है। यह सूत्र भगवान विष्णु के अनंत रूपों का प्रतीक माना जाता है। लोग अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति के लिए इस दिन विशेष प्रार्थना करते हैं।
इस दिन का आध्यात्मिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह भक्ति और त्याग का संदेश देता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा सामग्री तैयार करते हैं और पूरे भक्ति भाव के साथ विसर्जन की प्रक्रिया को संपन्न करते हैं।
आचार्य मदन मोहन ने सलाह दी है कि विसर्जन के दौरान नियमों का पालन करना चाहिए। सही मुहूर्त में पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्त इस दिन अपने घरों और पंडालों में विशेष सजावट करते हैं और भगवान को भोग अर्पित करते हैं।
अंत में, अनंत चतुर्दशी का पर्व हमें निरंतर आगे बढ़ने और बुराइयों को विसर्जित करने की प्रेरणा देता है। यह दिन न केवल गणेश विसर्जन का है, बल्कि आत्म-चिंतन और ईश्वर के प्रति समर्पण का भी अवसर प्रदान करता है।
