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अयोध्या राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी ने सौंपी अपनी रिपोर्ट

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है। राजेश पांडेय इस पद के लिए सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं, जबकि परेश सक्सेना और दिनेश चंद्र के नाम भी चर्चा में हैं। अब ट्रस्ट जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लेगा।

अयोध्या राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी ने सौंपी अपनी रिपोर्ट
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: Gamerzer · CC BY-SA 4.0 · Openverse

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। इस महत्वपूर्ण पद के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने मंगलवार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट ट्रस्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दी है। अब ट्रस्ट के पदाधिकारी इस रिपोर्ट का अध्ययन कर जल्द ही अंतिम फैसला लेंगे।

सूत्रों के अनुसार, इस पद की दौड़ में राजेश पांडेय का नाम सबसे आगे चल रहा है। उनकी कार्यशैली और अनुभव को देखते हुए उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, इस दौड़ में अन्य नाम भी काफी चर्चा में हैं जो अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।

परेश सक्सेना और दिनेश चंद्र के नाम भी इस पद के लिए काफी मजबूती से लिए जा रहे हैं। इन दोनों अधिकारियों की पृष्ठभूमि और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए ट्रस्ट के भीतर इन पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सर्च कमेटी ने सभी पहलुओं का आकलन करने के बाद ही अपनी सिफारिशें सौंपी हैं।

राम मंदिर के प्रबंधन और संचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए एक पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति को अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है। वर्तमान में ट्रस्ट के कार्यों को संभालने के लिए एक व्यवस्थित ढांचे की जरूरत है, जिसे इस नियुक्ति के बाद और अधिक मजबूती मिलेगी।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सर्च कमेटी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है और अब गेंद ट्रस्ट के पाले में है। ट्रस्ट के सदस्य अब सभी दावेदारों के प्रोफाइल और कमेटी की सिफारिशों का मिलान करेंगे।

इस नियुक्ति से मंदिर परिसर की सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था और भक्तों की सुविधाओं के प्रबंधन में एक नई कार्यप्रणाली लागू होने की उम्मीद है। ट्रस्ट का प्रयास है कि एक ऐसे व्यक्ति को यह जिम्मेदारी दी जाए जो मंदिर की गरिमा और प्रशासनिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन बना सके।

आने वाले कुछ दिनों में ट्रस्ट की बैठक में इस विषय पर चर्चा होने की संभावना है। इसके बाद ही आधिकारिक रूप से पहले पूर्णकालिक सीईओ के नाम की घोषणा की जाएगी।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्यामूल रिपोर्ट देखें ↗