अयोध्या राम मंदिर दान मामले में SIT की जांच पूरी, 105 बार चोरी की घटनाओं का खुलासा
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपों की जांच SIT ने पूरी कर ली है। जांच के दौरान CCTV फुटेज से 105 संदिग्ध घटनाओं की पुष्टि हुई है। मामले में 1000 किलो सफेद धातु और 86 कीमती वस्तुओं के गायब होने का भी जिक्र है। एजेंसी 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल कर सकती है।
VIMARSHNAARAD TVअयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित हेराफेरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी विस्तृत जांच पूरी कर ली है। NDTV इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में अब कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसी ने अपनी पड़ताल के दौरान मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों के फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया है।
जांच के दौरान SIT ने 105 ऐसी घटनाओं को चिन्हित किया है, जिनमें दान और चढ़ावे में चोरी या हेराफेरी का संदेह है। इन फुटेज के आधार पर एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है। यह मामला मंदिर की पवित्रता और दान प्रबंधन से जुड़ा होने के कारण काफी संवेदनशील माना जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मंदिर से जुड़ी करीब 1000 किलो सफेद धातु और 86 कीमती वस्तुएं गायब होने का मामला सामने आया है। इन वस्तुओं के प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, जिनकी जांच SIT ने अपने स्तर पर की है।
प्रशासनिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, SIT इस मामले में अपनी चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। संभावना जताई जा रही है कि 25 सितंबर तक अदालत में चार्जशीट पेश कर दी जाएगी। इसके बाद मामले में कानूनी कार्रवाई और तेज होने की उम्मीद है।
मंदिर प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के लिए यह जांच एक बड़ी चुनौती रही है। SIT ने साक्ष्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया है ताकि दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा सके।
फिलहाल, मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस इस मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। जांच पूरी होने के बाद अब सभी की निगाहें 25 सितंबर की तारीख पर टिकी हैं, जब चार्जशीट के जरिए पूरे मामले का खुलासा होगा।
यह घटनाक्रम मंदिर की सुरक्षा और दान प्रबंधन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए मंदिर प्रशासन को नई सुरक्षा नीतियों पर विचार करना पड़ सकता है।