अलीगंज अग्निकांड: हाईकोर्ट ने आरोपी किरायेदार सुरेंद्र साहू को दी जमानत, मालिक नहीं होने का दिया हवाला
लखनऊ हाईकोर्ट ने 22 जून को अलीगंज में हुई भीषण आग की घटना के आरोपी सुरेंद्र साहू को जमानत दे दी है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी घटना के समय वहां केवल एक किरायेदार के रूप में रह रहा था, न कि संपत्ति का मालिक। इस अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गई थी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने मामले की गंभीरता और आरोपी की भूमिका को देखते हुए यह राहत दी है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बीते 22 जून को हुए अलीगंज अग्निकांड के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में आरोपी सुरेंद्र साहू को जमानत प्रदान कर दी है। यह घटना उस समय चर्चा में आई थी जब आग लगने के कारण 15 लोगों की दुखद मृत्यु हो गई थी।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, जमानत की सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया। न्यायाधीश ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि सुरेंद्र साहू उस परिसर का मालिक नहीं था, बल्कि वहां केवल एक किरायेदार के तौर पर रह रहा था।
अदालत ने इस तथ्य को जमानत का आधार माना कि आरोपी की भूमिका संपत्ति के स्वामित्व या उसके रखरखाव से जुड़ी नहीं थी। कानूनी प्रक्रिया के तहत, किरायेदार होने के नाते उसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही मालिक से भिन्न होती है।
गौरतलब है कि 22 जून को हुई इस त्रासदी ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। आग की चपेट में आने से 15 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।
इस मामले में सुरेंद्र साहू को आरोपी बनाया गया था और वह लंबे समय से न्यायिक हिरासत में था। उसके वकीलों ने अदालत के समक्ष तर्क दिया था कि वह घटना के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं है क्योंकि वह केवल वहां किराये पर रह रहा था।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। हालांकि, जमानत की शर्तें और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही उसे जेल से बाहर आने की अनुमति मिलेगी।
यह निर्णय कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले में आरोपी की भूमिका और उसकी स्थिति का आकलन करना न्याय के लिए अत्यंत आवश्यक है।