अहलावत परिवार की 140 साल पुरानी सैन्य परंपरा, पांचवीं पीढ़ी के शिवम बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट
हरियाणा के झज्जर जिले के गोच्छी गांव का अहलावत परिवार पिछले 140 वर्षों से भारतीय सेना को अपनी सेवाएं दे रहा है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के साथ कारगिल युद्ध में भी इस परिवार के सदस्यों ने वीरता दिखाई है। अब इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए परिवार की पांचवीं पीढ़ी के शिवम अहलावत सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त हुए हैं।
VIMARSHNAARAD TVहरियाणा के झज्जर जिले में स्थित गोच्छी गांव का अहलावत परिवार अपनी सैन्य विरासत के लिए जाना जाता है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह परिवार पिछले 140 वर्षों से लगातार भारतीय सेना का हिस्सा रहा है और देश की सुरक्षा में अपना योगदान दे रहा है।
इस परिवार का इतिहास वीरता और बलिदान से भरा हुआ है। परिवार के सदस्यों ने प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध जैसे वैश्विक संघर्षों में अपनी बहादुरी का परिचय दिया है। इसके अलावा, कारगिल युद्ध के दौरान भी अहलावत परिवार के वीरों ने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया था।
अब इस लंबी और गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का जिम्मा पांचवीं पीढ़ी ने संभाला है। शिवम अहलावत, जो इस परिवार के युवा सदस्य हैं, हाल ही में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त हुए हैं। शिवम की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है।
अहलावत परिवार की यह गाथा पीढ़ियों से चली आ रही है, जहां हर नई पीढ़ी ने सेना में शामिल होकर देश सेवा को ही अपना धर्म माना है। उनके घर में सैन्य अनुशासन और देशभक्ति का माहौल हमेशा से रहा है।
शिवम के लेफ्टिनेंट बनने पर उनके परिजनों ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि किस तरह उनके पूर्वजों ने कठिन परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा की और अब शिवम उसी रास्ते पर चल रहे हैं।
यह परिवार आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। गोच्छी गांव के लोग इस बात पर गर्व करते हैं कि उनका गांव एक ऐसे परिवार का घर है जिसने एक सदी से अधिक समय तक सेना को समर्पित सैनिक दिए हैं।
शिवम अहलावत की नियुक्ति इस बात का प्रतीक है कि अहलावत परिवार की सैन्य सेवा की यह परंपरा भविष्य में भी जारी रहेगी। देश के प्रति उनका यह समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है।