आंध्र प्रदेश की कोमारागिरी अंकामा का कचरा उठाने से वित्तीय आत्मनिर्भरता तक का प्रेरणादायक सफर
आंध्र प्रदेश के गुंटूर की रहने वाली कोमारागिरी अंकामा ने 25 वर्षों तक कचरा उठाने का काम किया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) के तहत मिली सहायता से उनकी आय 8,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये प्रति माह हो गई है। इस आर्थिक मदद ने न केवल उनके परिवार की वित्तीय स्थिति को सुधारा है, बल्कि उन्हें एक नई पहचान और आत्मविश्वास भी प्रदान किया है।

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले की रहने वाली 45 वर्षीय कोमारागिरी अंकामा की कहानी संघर्ष और सफलता का एक उदाहरण है। अनुसूचित जनजाति समुदाय से ताल्लुक रखने वाली अंकामा ने बचपन से ही अपने माता-पिता के साथ कचरा उठाने का काम शुरू कर दिया था। गरीबी और शिक्षा के अभाव के कारण उन्हें 25 वर्षों तक इसी कठिन पेशे में रहना पड़ा।
अंकामा के लिए जीवन आसान नहीं था। सप्ताह में छह दिन कड़ी मेहनत करने के बावजूद, उनकी दैनिक कमाई मात्र 150 से 200 रुपये के बीच रहती थी। सीमित आय और सामाजिक भेदभाव के कारण उनके परिवार के लिए बुनियादी जरूरतों को पूरा करना और आपातकालीन स्थितियों के लिए बचत करना एक बड़ी चुनौती थी।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की 'स्वच्छता उद्यमी योजना' (एसयूवाई) उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव लेकर आई। 19 जून 2023 को, उन्हें नवजीवन संस्थान के माध्यम से पांच सदस्यों वाली एक ग्रुप परियोजना के तहत सहायता प्रदान की गई। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 50 लाख रुपये थी, जिसमें ऋण और सब्सिडी दोनों शामिल थे।
इस सरकारी मदद का सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, योजना से जुड़ने के बाद उनकी मासिक आय 8,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई है। उन्हें हर महीने लगभग 10,000 रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
अंकामा ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि इस अतिरिक्त आय ने उनके परिवार की आर्थिक सुरक्षा को काफी मजबूत किया है। अब वह न केवल घर का खर्च आसानी से चला पा रही हैं, बल्कि भविष्य की जरूरतों के लिए बचत भी कर रही हैं।
यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि इसने अंकामा और उनके परिवार में एक नया आत्मविश्वास भी भरा है। उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि यदि कचरा उठाने वाले लोगों को सही समय पर सरकारी सहायता और संसाधन मिलें, तो वे अपनी आजीविका को बेहतर बना सकते हैं।
अंकामा की कहानी अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है, जो विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष कर रहे हैं। यह सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को भी रेखांकित करती है, जो समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम हैं।
