आईआईटी बॉम्बे में छात्र की मृत्यु: एनसीएससी अध्यक्ष किशोर मकवाना ने की मौके पर जांच
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने आईआईटी बॉम्बे का दौरा कर छात्र साहिल वाकोडे की मृत्यु की जांच की। उन्होंने संस्थान के अधिकारियों और पुलिस के साथ बैठक कर साक्ष्यों के संरक्षण के निर्देश दिए। परिवार ने जाति आधारित भेदभाव के आरोप लगाए हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के अध्यक्ष श्री किशोर मकवाना ने आईआईटी बॉम्बे में बी.टेक द्वितीय वर्ष के छात्र श्री साहिल वाकोडे की मृत्यु के मामले में घटनास्थल पर जाकर विस्तृत जांच की। यह दौरा मृतक के परिवार द्वारा लगाए गए जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के बाद किया गया।
आयोग के अध्यक्ष ने संस्थान के निदेशक, रजिस्ट्रार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लंबी बातचीत की। उन्होंने 18 सितंबर 2026 को हुई उस घटना का ब्योरा मांगा, जब छात्र पर परीक्षा के दौरान शैक्षणिक कदाचार का आरोप लगा था। आयोग ने उन परिस्थितियों की समीक्षा की जिनमें छात्र से पूछताछ की गई थी।
श्री मकवाना ने निर्देश दिया कि सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और परीक्षा संबंधी सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने स्वयं उस परीक्षा कक्ष और छात्रावास के कमरे का निरीक्षण किया जहां छात्र रहता था। उन्होंने साथी छात्रों से भी बातचीत की ताकि परिसर के माहौल को समझा जा सके।
जांच के अगले चरण में, अध्यक्ष ने मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित होनी चाहिए। सभी साक्ष्यों को कानून के अनुसार एकत्र करने और संरक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले की बारीकी से निगरानी करेगा। अध्यक्ष ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे सभी संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज करें और जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट आयोग को सौंपें। यह सुनिश्चित करना प्राथमिकता है कि अनुसूचित जाति के छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हो।
मृतक के माता-पिता से मुलाकात के दौरान, श्री मकवाना ने उनकी चिंताओं को सुना और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। परिवार ने लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिस पर आयोग अपने वैधानिक दायरे में कार्रवाई करेगा। आयोग ने संस्थानों में गरिमा और समानता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस जांच के दौरान एनसीएससी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी अध्यक्ष के साथ मौजूद थे। आयोग का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र होना अनिवार्य है ताकि किसी भी छात्र को भेदभाव का सामना न करना पड़े। मामले की अगली प्रगति रिपोर्ट का इंतजार है।
