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आईसीओएएस दिवस 2026: आत्मनिर्भर भारत के लिए लागत प्रबंधन और वित्तीय दक्षता पर जोर

भारतीय लागत लेखा सेवा (आईसीओएएस) ने अपना स्थापना दिवस मनाया, जिसमें आत्मनिर्भर भारत के लिए लागत अनुकूलन की भूमिका पर चर्चा की गई। रक्षा और वित्त मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने वित्तीय विवेक और नवाचार के महत्व को रेखांकित किया।

आईसीओएएस दिवस 2026: आत्मनिर्भर भारत के लिए लागत प्रबंधन और वित्तीय दक्षता पर जोर
आधिकारिक स्रोत का चित्र: Press Information Bureau, Government of India · PIB reusable material · Press Information Bureau

नई दिल्ली में आयोजित आईसीओएएस दिवस 2026 के अवसर पर भारतीय लागत लेखा सेवा के अधिकारियों ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम में रक्षा विभाग के सचिव राजेश कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार विशिष्ट अतिथि रहे।

इस वर्ष का मुख्य विषय 'आत्मनिर्भर भारत के लिए लागत अनुकूलन में आईसीओएएस अधिकारियों की भूमिका' रखा गया था। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने सरकारी विभागों में लागत प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए अधिकारियों की विश्लेषणात्मक क्षमता और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में वित्तीय निगरानी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक उत्प्रेरक है।

रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने में लागत लेखांकन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ेगी। उन्होंने अधिकारियों से रणनीतिक क्षेत्रों के साथ बेहतर तालमेल बनाने का आह्वान किया।

वित्त मंत्रालय के व्यय सचिव वी. वुआलनम ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी के बढ़ते दौर में आईसीओएएस अधिकारी लागत दक्षता और उचित जोखिम आवंटन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कार्यक्रम के दौरान सेवा का एक स्मारक ई-ब्रॉचर जारी किया गया। मुख्य सलाहकार (लागत) आनंद कुमार पाल ने अधिकारियों को नवीनतम वित्तीय मॉडलिंग और डेटा विजुअलाइजेशन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

युवा अधिकारियों के उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता देते हुए छह अधिकारियों को प्रशंसा प्रमाण पत्रों से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग और तनाव प्रबंधन पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, ताकि अधिकारियों को आधुनिक चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।

यह आयोजन क्षमता निर्माण और रणनीतिक संवाद के लिए एक मंच साबित हुआ, जिसने विकसित भारत के निर्माण में आईसीओएएस की अपरिहार्य भूमिका को स्पष्ट किया।

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