आगरा का जयपुर राज हाउस: कभी अंग्रेजों का सचिवालय और पीएसी बैरक, अब है जीएसटी कार्यालय
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, आगरा स्थित जयपुर राज हाउस का इतिहास काफी पुराना है। स्वतंत्रता के बाद, इस संपत्ति की सुरक्षा के लिए 1 अप्रैल 1948 को 10वीं वाहिनी पीएसी तैनात की गई थी। कभी अंग्रेजों का सचिवालय और दंगों के दौरान पीएसी का ठिकाना रही यह इमारत अब जीएसटी कार्यालय के रूप में उपयोग की जा रही है। उस समय इसका किराया 3,300 रुपये तय किया गया था।
VIMARSHNAARAD TVआगरा के जयपुर राज हाउस का इतिहास काफी दिलचस्प और विविध रहा है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, यह इमारत समय के साथ कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रही है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, इस ऐतिहासिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 1 अप्रैल 1948 को 10वीं वाहिनी पीएसी को यहां तैनात किया गया था।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि यह स्थान कभी अंग्रेजों का सचिवालय हुआ करता था। समय के साथ इसकी उपयोगिता बदलती रही। एक दौर ऐसा भी आया जब दंगों के दौरान यह इमारत पीएसी के जवानों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बनी थी।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि उस समय इस संपत्ति के लिए 3,300 रुपये का किराया दिया गया था। यह राशि उस दौर के हिसाब से एक महत्वपूर्ण वित्तीय लेनदेन थी। इस इमारत को पीएसी के लिए बैरक के रूप में इस्तेमाल किया गया था, जो इसकी सुरक्षा और उपयोगिता को दर्शाता है।
वर्तमान समय में, जयपुर राज हाउस का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। अब यह ऐतिहासिक इमारत स्टेट जीएसटी कार्यालय के रूप में कार्यरत है। सरकारी कामकाज के लिए इसका उपयोग होने से यह स्थान फिर से चर्चा में है।
इस इमारत का सफर सचिवालय से लेकर पीएसी बैरक और अब जीएसटी कार्यालय तक का रहा है। यह आगरा के प्रशासनिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करता है।
स्थानीय स्तर पर इस इमारत का अपना एक अलग महत्व है। लोग इसे आज भी इसके पुराने इतिहास के साथ जोड़कर देखते हैं। पीएसी की तैनाती और सचिवालय के रूप में इसका उपयोग इसे अन्य सरकारी इमारतों से अलग बनाता है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह इमारत न केवल प्रशासनिक कार्यों का केंद्र रही है, बल्कि इसने देश के बदलते दौर को भी करीब से देखा है। आज भी यह इमारत अपनी पुरानी यादों और वर्तमान उपयोग के बीच एक सेतु का काम कर रही है।