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आगरा के गांधी शिल्प मेले में दिखा देश भर के हुनर का अद्भुत संगम, अनूठी कलाकृतियों ने जीता दिल

आगरा के सदर क्षेत्र में आयोजित गांधी शिल्प मेले में देशभर के कारीगरों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इस मेले में नारियल के खोल से बनी सजावटी वस्तुएं, कबाड़ से तैयार की गई पेंटिंग्स और दरभंगा की प्रसिद्ध मधुबनी कलाकृतियां आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं। प्राकृतिक रंगों के उपयोग से बनी इन कलाकृतियों की कीमत 50 हजार रुपये तक है, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

आगरा के सदर इलाके में चल रहा गांधी शिल्प मेला इन दिनों कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस आयोजन में भारत के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों ने अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन किया है। मेले में प्रवेश करते ही दर्शकों को देश की सांस्कृतिक विविधता और कारीगरों की मेहनत साफ नजर आती है।

मेले की सबसे बड़ी खासियत यहां मौजूद कबाड़ से बनी पेंटिंग्स हैं। कलाकारों ने बेकार पड़ी वस्तुओं का उपयोग करके बेहद खूबसूरत और संदेश देने वाली कलाकृतियां तैयार की हैं। इसके अलावा, नारियल के खोल से बनी सजावटी सामग्री भी लोगों को खूब पसंद आ रही है, जो पर्यावरण के प्रति जागरूकता का भी संदेश देती है।

बिहार के दरभंगा से आए कलाकारों द्वारा लाई गई मधुबनी पेंटिंग्स इस मेले की शोभा बढ़ा रही हैं। इन पेंटिंग्स में पूरी तरह से प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है, जो इन्हें और भी खास बनाता है। इन कलाकृतियों की बारीकी और जीवंतता दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, मेले में प्रदर्शित कुछ विशेष कलाकृतियों की कीमत 50 हजार रुपये तक है। इतनी महंगी होने के बावजूद, लोग इन हस्तशिल्प वस्तुओं की सराहना कर रहे हैं और उन्हें खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। यह मेला स्थानीय लोगों के लिए कला और संस्कृति को करीब से जानने का एक बेहतरीन अवसर है।

शिल्पकारों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से उन्हें अपनी कला को बड़े मंच पर ले जाने का मौका मिलता है। मेले में मौजूद हर स्टॉल पर अलग-अलग राज्यों की परंपराओं की झलक देखने को मिल रही है। यह आयोजन न केवल हस्तशिल्प को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि कारीगरों की आजीविका का भी एक महत्वपूर्ण जरिया बना हुआ है।

आगरा के निवासियों के लिए यह मेला एक उत्सव जैसा है, जहां वे न केवल खरीदारी कर रहे हैं बल्कि भारतीय कला के विभिन्न रूपों को भी समझ रहे हैं। मेले में आने वाले दर्शकों की भीड़ यह दर्शाती है कि लोग आज भी पारंपरिक हस्तशिल्प को काफी महत्व देते हैं।

प्रशासन और आयोजकों के प्रयासों से यह मेला एक सफल आयोजन के रूप में उभर रहा है। आने वाले दिनों में और भी अधिक लोगों के यहां पहुंचने की उम्मीद है, जिससे शिल्पकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने और उसे बेचने का बेहतर अवसर प्राप्त होगा।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरामूल रिपोर्ट देखें ↗