आगरा दीवानी लाठीचार्ज के 25 साल बाद भी मालवीय आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक होने का इंतजार जारी
आगरा में 26 सितंबर 2001 को वकीलों पर हुए लाठीचार्ज की घटना को पच्चीस साल बीत चुके हैं। इस मामले की जांच के लिए गठित मालवीय आयोग की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है। एक अधिवक्ता ने आरटीआई के माध्यम से इस रिपोर्ट और उस पर की गई कार्रवाई का विवरण मांगा है, ताकि दशकों पुरानी इस घटना का सच सामने आ सके।
VIMARSHNAARAD TVआगरा की दीवानी कचहरी में 26 सितंबर 2001 को अधिवक्ताओं पर हुए लाठीचार्ज की घटना आज भी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस घटना को बीते हुए पच्चीस साल का लंबा समय हो चुका है, लेकिन न्याय की प्रतीक्षा अभी भी जारी है। उस समय वकीलों पर हुए हमले के बाद मामले की जांच के लिए मालवीय आयोग का गठन किया गया था।
संवाद न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अब तक सच्चाई सामने नहीं आ सकी है। लंबे समय से यह रिपोर्ट फाइलों में ही दबी हुई है। अब एक अधिवक्ता ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) का सहारा लेते हुए इस आयोग की रिपोर्ट की प्रति मांगी है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में अब तक हुई कार्रवाई का पूरा ब्योरा भी मांगा है।
दीवानी लाठीचार्ज की यह घटना आगरा के न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है। उस दिन हुई हिंसा के बाद वकीलों ने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन किया था। आयोग का गठन इसी उद्देश्य से किया गया था कि घटना के कारणों और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।
हालांकि, इतने वर्षों के बाद भी रिपोर्ट का सार्वजनिक न होना कई सवाल खड़े करता है। अधिवक्ता का मानना है कि आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच रिपोर्ट का क्या हुआ। साथ ही, यह भी पता चल सकेगा कि क्या उस समय कोई ठोस कार्रवाई की गई थी या मामला केवल कागजों तक ही सीमित रहा।
न्याय की आस में बैठे लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। पच्चीस साल का समय बीत जाने के बाद भी पीड़ित पक्ष को अभी भी उस रिपोर्ट का इंतजार है जो इस घटना के हर पहलू को उजागर कर सकती है। अब देखना यह होगा कि आरटीआई के जवाब में प्रशासन की ओर से क्या जानकारी साझा की जाती है।
यह मामला न केवल उस समय के वकीलों के लिए बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र के लिए एक सबक की तरह है। पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए अधिवक्ता ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। उम्मीद है कि इस प्रयास से दशकों पुरानी इस घटना की फाइलें फिर से खुलेंगी और सच सामने आएगा।