आगरा में खुले नालों से बढ़ रहा जान का खतरा, एनजीटी का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में एक्टिविस्ट
आगरा में खुले नाले आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। इन खतरों और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए स्थानीय एक्टिविस्ट अब कानूनी रास्ता अपनाने जा रहे हैं। उन्होंने नगर निगम के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर करने के लिए आवश्यक ब्योरा तैयार कर लिया है।
VIMARSHNAARAD TVआगरा शहर में खुले नालों की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है, जिससे स्थानीय निवासियों की जान पर हर वक्त खतरा बना रहता है। इन नालों के कारण न केवल दुर्घटनाओं का डर रहता है, बल्कि इनसे फैलने वाली गंदगी स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती बनी हुई है।
लगातार हो रही घटनाओं और प्रशासन की कथित लापरवाही से नाराज होकर अब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। एक्टिविस्टों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद नगर निगम ने इन नालों को ढकने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
इस स्थिति को देखते हुए एक्टिविस्टों ने अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का रुख करने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि कानूनी हस्तक्षेप के बिना इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।
एक्टिविस्टों ने एनजीटी में याचिका दायर करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। उन्होंने शहर के विभिन्न हिस्सों में खुले नालों का विस्तृत ब्योरा और उनसे होने वाली समस्याओं के साक्ष्य एकत्र किए हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह ब्योरा नगर निगम की विफलता को उजागर करने के लिए तैयार किया गया है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि खुले नाले न केवल राहगीरों के लिए खतरनाक हैं, बल्कि ये शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवालिया निशान खड़े करते हैं।
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से वे इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।
अब देखना यह होगा कि एनजीटी में मामला जाने के बाद प्रशासन का क्या रुख रहता है और क्या इन नालों को ढकने का काम शुरू हो पाता है या नहीं।
यह कानूनी लड़ाई शहर के बुनियादी ढांचे और जन सुरक्षा के प्रति प्रशासन की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।