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आगरा में ग्रीन गैस बिल के नाम पर साइबर ठगी, ऐप डाउनलोड कराते ही खाते से उड़े 6 लाख

आगरा में साइबर अपराधियों ने ग्रीन गैस बिल अपडेट करने के बहाने एक व्यक्ति को अपना शिकार बनाया है। ठगों ने पीड़ित को एक फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा और फिर कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए उनके बैंक खाते से 6 लाख रुपये उड़ा लिए। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में इस धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने लोगों को अनजान मैसेज और लिंक से सावधान रहने की सलाह दी है।

आगरा में ग्रीन गैस बिल के नाम पर साइबर ठगी, ऐप डाउनलोड कराते ही खाते से उड़े 6 लाख
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: Visual Content · CC BY 2.0 · Openverse

आगरा में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है, जिसमें ग्रीन गैस बिल अपडेट करने के नाम पर एक व्यक्ति को लाखों का चूना लगाया गया है। अपराधियों ने पीड़ित को व्हाट्सएप पर एक संदेश भेजा, जिसमें बिल अपडेट करने का झांसा दिया गया था।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, ठगों ने पीड़ित को एक संदिग्ध फाइल डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया। जैसे ही पीड़ित ने फाइल डाउनलोड की, अपराधियों ने उनके फोन पर कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय कर दी। इसके बाद, पीड़ित के बैंक खाते से 6 लाख रुपये की राशि निकाल ली गई।

घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच कर रही है और अपराधियों की तलाश में जुटी है। इस तरह की घटनाओं ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

साइबर विशेषज्ञों और पुलिस ने आम जनता को आगाह किया है कि वे किसी भी अनजान नंबर से आए संदेशों या लिंक पर क्लिक न करें। विशेष रूप से बिल भुगतान या अपडेट से संबंधित संदेशों के प्रति अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

ठग अक्सर लोगों को डराने या लालच देने के लिए आधिकारिक संस्थाओं के नाम का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान ऐप को डाउनलोड करना या कॉल फॉरवर्डिंग जैसी सेटिंग्स को अनुमति देना खतरनाक हो सकता है।

इस मामले में पीड़ित को जिस तरह से फंसाया गया, वह साइबर अपराधियों के नए तौर-तरीकों को दर्शाता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना दें।

आगरा में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता ही बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। प्रशासन अब इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रहा है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरामूल रिपोर्ट देखें ↗