आगरा में महिलाओं के स्वरोजगार पर बैंकों की सुस्ती: 5000 के लक्ष्य के मुकाबले केवल 2544 को ऋण
आगरा में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को बिना गारंटी ऋण देने की सरकारी योजना बैंकों की सुस्ती के कारण पिछड़ रही है। जिले में 5000 समूहों को ऋण देने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 2,544 समूहों को ही मंजूरी मिल पाई है। इस धीमी गति से महिलाओं के स्वरोजगार के प्रयासों को झटका लग रहा है, जिससे स्थानीय प्रशासन भी चिंतित है।
VIMARSHNAARAD TVआगरा में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की योजना बैंकों के ढुलमुल रवैये के कारण प्रभावित हो रही है। सरकार ने महिलाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए बिना गारंटी ऋण देने की व्यवस्था की है, लेकिन बैंकों द्वारा ऋण आवेदनों को मंजूरी देने की गति बेहद धीमी है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के लिए आगरा जिले में 5,000 स्वयं सहायता समूहों को ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि, लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 2,544 समूहों को ही ऋण की मंजूरी मिल सकी है। यह आंकड़ा निर्धारित लक्ष्य से काफी कम है, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।
बैंकों की इस सुस्ती के कारण उन महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जो अपने छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण का इंतजार कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं सिलाई, बुनाई, अचार बनाने और अन्य लघु उद्योगों से जुड़कर अपनी आय बढ़ाना चाहती हैं, लेकिन पूंजी के अभाव में उनके सपने अधूरे रह जाते हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि बैंकों को बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद आवेदनों के निस्तारण में तेजी नहीं आ रही है। कई बार बैंक अधिकारी दस्तावेजों की कमी या अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देकर आवेदनों को लंबित रखते हैं। इससे न केवल महिलाओं का समय बर्बाद होता है, बल्कि उनके उत्साह में भी कमी आती है।
स्वयं सहायता समूहों के लिए बिना गारंटी ऋण की सुविधा इसलिए दी गई थी ताकि गरीब और जरूरतमंद महिलाएं आसानी से अपना काम शुरू कर सकें। लेकिन बैंकों की जटिल प्रक्रियाओं ने इस सुविधा को एक कठिन चुनौती बना दिया है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो जिले के लिए तय किया गया वार्षिक लक्ष्य पूरा करना मुश्किल हो जाएगा।
स्थानीय प्रशासन अब बैंकों के साथ समन्वय बैठकें कर इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बैंकों को यह समझना होगा कि यह एक सरकारी प्राथमिकता वाली योजना है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं है। जल्द ही एक समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी ताकि लंबित आवेदनों को तेजी से निपटाया जा सके।
महिलाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा देना सरकार की एक प्रमुख प्राथमिकता है। यदि बैंक समय पर ऋण उपलब्ध नहीं कराएंगे, तो इस योजना का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में बैंकों के रुख में बदलाव आएगा और अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों को ऋण मिल सकेगा, जिससे महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिल सकेगी।