आगरा: 2015 में कैदी फरार होने के मामले में चार पुलिसकर्मी बरी, अदालत ने दिया संदेह का लाभ
आगरा की एक अदालत ने वर्ष 2015 में एसएन मेडिकल कॉलेज से कैदी के भागने के मामले में चार पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा। अदालत ने माना कि पुलिस की लापरवाही तो थी, लेकिन मिलीभगत के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले, जिसके चलते आरोपियों को संदेह का लाभ दिया गया।
VIMARSHNAARAD TVआगरा की एक अदालत ने वर्ष 2015 में एसएन मेडिकल कॉलेज से एक कैदी के फरार होने से जुड़े मामले में चार पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त करार दिया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, अपर सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्यों के अभाव में यह फैसला सुनाया है।
मामला नौ साल पुराना है, जब एक कैदी इलाज के दौरान अस्पताल से भाग निकला था। इस घटना के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों पर लापरवाही और मिलीभगत के आरोप लगे थे। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कई तर्क दिए गए, लेकिन वे अदालत को संतुष्ट करने में नाकाम रहे।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मियों की ओर से लापरवाही बरती गई थी, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि कैदी को भगाने में उनकी कोई मिलीभगत थी। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों में कमी के कारण न्यायाधीश ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
इस फैसले के बाद कानूनी जानकारों का मानना है कि किसी भी आपराधिक मामले में ठोस साक्ष्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं जुटा पाता, तो अदालतें संदेह का लाभ देने के लिए बाध्य होती हैं।
यह घटना उस समय काफी चर्चा में रही थी, क्योंकि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान से कैदी का भागना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। हालांकि, न्यायिक प्रक्रिया के तहत अब इन चार पुलिसकर्मियों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया है।
अदालत के इस निर्णय ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि केवल लापरवाही के आधार पर मिलीभगत का आरोप सिद्ध नहीं किया जा सकता। पुलिस विभाग के लिए यह मामला भविष्य में सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त बनाने की सीख के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल, इस मामले में कानूनी कार्यवाही पूरी हो चुकी है और चारों पुलिसकर्मियों को राहत मिली है।