आठ साल तक स्कूल से गायब रहने वाले शिक्षक की सेवा समाप्त, नोटिस का भी नहीं दिया जवाब
उत्तर प्रदेश के एत्मादपुर स्थित मुखवार कंपोजिट विद्यालय में तैनात एक शिक्षक को आठ साल तक बिना सूचना के अनुपस्थित रहने के कारण बर्खास्त कर दिया गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षक को कई बार नोटिस भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने किसी का भी जवाब नहीं दिया। लंबे समय से स्कूल से नदारद रहने और विभागीय निर्देशों की अनदेखी करने के बाद प्रशासन ने उनकी सेवा समाप्त करने का कड़ा निर्णय लिया है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश के एत्मादपुर क्षेत्र में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सरकारी शिक्षक ने पिछले आठ वर्षों से स्कूल का मुंह तक नहीं देखा। मुखवार कंपोजिट विद्यालय में तैनात इस शिक्षक की लंबी अनुपस्थिति ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षक बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के इतने लंबे समय तक अपने कर्तव्य से दूर रहे। इस दौरान उन्होंने न तो स्कूल में उपस्थिति दर्ज कराई और न ही विभाग के किसी भी संपर्क का जवाब दिया।
विभाग द्वारा शिक्षक को उनकी अनुपस्थिति के संबंध में कई बार नोटिस जारी किए गए थे। इन नोटिसों का उद्देश्य शिक्षक से उनकी स्थिति स्पष्ट करने और उन्हें काम पर वापस बुलाने का था, लेकिन शिक्षक ने किसी भी नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया।
लगातार आठ वर्षों तक स्कूल से गायब रहने और विभागीय निर्देशों की घोर अनदेखी करने के बाद, प्रशासन ने अंततः उनकी सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह कार्रवाई नियमों के उल्लंघन और कर्तव्य के प्रति लापरवाही के कारण की गई है।
इस मामले ने स्थानीय स्तर पर चर्चा छेड़ दी है कि आखिर कैसे एक सरकारी कर्मचारी इतने लंबे समय तक बिना किसी कार्रवाई के गायब रह सकता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अब इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए शिक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
यह घटना सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और जवाबदेही सुनिश्चित करने की चुनौती को उजागर करती है। विभाग अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि इस अवधि के दौरान क्या शिक्षक को कोई वेतन या अन्य लाभ प्राप्त हुए हैं, और यदि ऐसा है, तो उसकी वसूली कैसे की जाएगी।
फिलहाल, शिक्षक की बर्खास्तगी के बाद विद्यालय में रिक्त पद को भरने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। यह मामला अन्य शिक्षकों के लिए भी एक चेतावनी है कि कर्तव्य के प्रति लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।