आधुनिक हथियारों की दौड़ में भारत की तैयारी पर सीडीएस ने एनडीटीवी डिफेंस समिट में दी जानकारी
एनडीटीवी डिफेंस समिट के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) ने आधुनिक हथियारों के क्षेत्र में भारत की तैयारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय सशस्त्र बल और रक्षा क्षेत्र के नए स्टार्टअप्स अब मिलकर काम कर रहे हैं। सीडीएस ने इस बात पर जोर दिया कि पहले की तुलना में अब रक्षा उद्योग को एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखा जा रहा है, जो देश की सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।
VIMARSHNAARAD TVएनडीटीवी डिफेंस समिट में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) ने देश की रक्षा तैयारियों और आधुनिक हथियारों की दौड़ में भारत की स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारतीय सशस्त्र बल अब रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप्स के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे रक्षा उत्पादन में नई गति आई है।
सीडीएस ने कहा कि कुछ साल पहले तक सशस्त्र बल और रक्षा उद्योग के बीच संवाद की कमी थी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब सशस्त्र बल रक्षा उद्योग को अपना एक अभिन्न भागीदार मानते हैं। यह बदलाव देश की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
समिट के दौरान उन्होंने बताया कि आधुनिक हथियारों की दौड़ में भारत अपनी क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है। स्टार्टअप्स के साथ मिलकर काम करने से न केवल नई तकनीकें विकसित हो रही हैं, बल्कि रक्षा क्षेत्र में नवाचार को भी बढ़ावा मिल रहा है।
सीडीएस के अनुसार, रक्षा क्षेत्र में यह तालमेल देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अब हम इंडस्ट्री को केवल एक सप्लायर के रूप में नहीं, बल्कि एक पार्टनर के रूप में देखते हैं। इस दृष्टिकोण से रक्षा क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
भारत की रक्षा तैयारियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हम आधुनिक हथियारों के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सशस्त्र बलों और निजी क्षेत्र के बीच का यह सहयोग भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत को और अधिक सक्षम बनाएगा।
एनडीटीवी डिफेंस समिट में दी गई यह जानकारी देश की रक्षा नीति और भविष्य की योजनाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। सीडीएस ने स्पष्ट किया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही भारत का मुख्य लक्ष्य है।
अंत में, उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों और उद्योग के बीच का यह नया तालमेल आने वाले समय में भारत को रक्षा क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।