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आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दायरा बढ़ाया

आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेज कर दिया है। मंत्रालय ने स्वास्थ्य, अनुसंधान और शिक्षा के लिए कई एआई-आधारित चैटबॉट और समाधान विकसित किए हैं। इसके साथ ही, भाषिणी के सहयोग से आयुष ग्रिड पोर्टल को 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है, जिससे पारंपरिक ज्ञान की पहुंच और प्रमाणिकता को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिल रही है।

आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दायरा बढ़ाया
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: Ministry of Defence · GODL-India · Wikimedia Commons

आयुष मंत्रालय ने आयुष ग्रिड के डिजिटल आधार को मजबूत करते हुए आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को प्रमुख तकनीक के रूप में अपनाया है। मंत्रालय स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में एआई की संभावनाओं का उपयोग कर रहा है।

मंत्रालय ने कई एआई-आधारित चैटबॉट पेश किए हैं। इनमें एमएआईएसपी (MAISP) चैटबॉट लोगों को आयुष संबंधी जानकारी देता है, जबकि एआरपी (ARP) रिसर्च असिस्टेंट शोधकर्ताओं को साहित्य खोजने में मदद करता है। इसके अलावा, ई-एलएमएस चैटबॉट छात्रों के लिए, ई-चरक औषधीय पौधों के व्यापार के लिए, योग सारथी योग सुझावों के लिए और निवेश सारथी निवेश संबंधी सहायता के लिए कार्य कर रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर भी इन प्रयासों को मान्यता मिली है। इंडियाएआई इम्पैक्ट समिट 2026 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर तैयार की गई केसबुक में आयुर्वेद के लिए एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली को शामिल किया गया है। यह प्रमाण-आधारित आयुर्वेदिक ज्ञान को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मंत्रालय इंडियाएआई इनोवेशन चैलेंज के माध्यम से आवाज आधारित इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड और व्यक्तिगत उपचार सहायता जैसे समाधान विकसित कर रहा है। 11 जुलाई 2025 को विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों ने भी पारंपरिक चिकित्सा में एआई के जिम्मेदार उपयोग पर एक तकनीकी रिपोर्ट जारी की थी, जिसके अनुरूप मंत्रालय कार्य कर रहा है।

डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग के साथ सहयोग के चलते आयुष ग्रिड के पोर्टल अब भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में उपलब्ध हैं। इससे देश की भाषाई विविधता के बीच आयुर्वेद के चिकित्सकों और विद्यार्थियों तक इन सेवाओं की पहुंच आसान हो गई है। मंत्रालय का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उसे अधिक सुलभ और प्रमाणिक बनाना है।

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मूल संदर्भ

01Press Information Bureauमूल रिपोर्ट देखें ↗