इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने माउंट हरमन का दौरा कर सैनिकों की मौजूदगी पर दिया बड़ा बयान
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीरिया और लेबनान की सीमा पर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखला 'जबल अल-शेख़' का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायली सेना वहां से पीछे नहीं हटेगी। माउंट हरमन के नाम से भी पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है, जिसके चलते नेतन्याहू ने वहां अपनी सेना की निरंतर उपस्थिति पर जोर दिया है।
VIMARSHNAARAD TVइजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सैन्य दौरे के तहत 'जबल अल-शेख़' का निरीक्षण किया। इस क्षेत्र को माउंट हरमन के नाम से भी जाना जाता है, जो सीरिया और लेबनान की सीमाओं के मिलन बिंदु पर स्थित है। अपनी यात्रा के दौरान, नेतन्याहू ने वहां तैनात इजरायली सैनिकों को संबोधित करते हुए अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इजरायली सेना इस रणनीतिक स्थान से किसी भी स्थिति में पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने इस क्षेत्र की सुरक्षात्मक अहमियत को रेखांकित करते हुए सैनिकों की मौजूदगी को देश की रक्षा के लिए अनिवार्य बताया। नेतन्याहू का यह बयान क्षेत्र में चल रहे तनावपूर्ण माहौल के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बीबीसी न्यूज़ हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, जबलपुर अल-शेख़ भौगोलिक रूप से एक अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक स्थान है। यह पहाड़ न केवल सीरिया और लेबनान की सीमाओं के करीब है, बल्कि यहां से आसपास के इलाकों पर कड़ी निगरानी रखना भी संभव होता है।
इजरायली नेतृत्व का मानना है कि इस ऊंचाई वाले क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखना उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का एक मुख्य हिस्सा है। नेतन्याहू ने सैनिकों के साथ बातचीत के दौरान उनके मनोबल को बढ़ाने का प्रयास किया और वहां की सैन्य तैयारियों का जायजा लिया।
इस दौरे के माध्यम से इजरायल ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है। हालांकि, इस क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चाएं होती रही हैं।
फिलहाल, नेतन्याहू के इस दौरे और उनके बयान को इजरायल की रक्षात्मक रणनीति के एक बड़े हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए इस पर्वत श्रृंखला पर इजरायली सैनिकों का डटे रहना आवश्यक है।
इस घटनाक्रम पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि माउंट हरमन की भौगोलिक स्थिति इसे एक प्राकृतिक निगरानी केंद्र बनाती है। नेतन्याहू का वहां जाकर यह बयान देना यह दर्शाता है कि इजरायल अपनी उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता है।