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इजरायल और ब्रिटेन के बीच तनाव: यहूदी बस्तियों पर लिए गए फैसले के बाद बंद होगा कॉन्सुलेट

ब्रिटेन द्वारा वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों के खिलाफ लिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले से इजरायल नाराज है। इस नाराजगी के चलते इजरायल ने ब्रिटेन के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए यूके का कॉन्सुलेट बंद करने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के बीच यह कूटनीतिक विवाद वेस्ट बैंक की स्थिति को लेकर गहरा गया है।

इजरायल और ब्रिटेन के बीच तनाव: यहूदी बस्तियों पर लिए गए फैसले के बाद बंद होगा कॉन्सुलेट
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: Alisdare Hickson from Woolwich, United Kingdom · CC BY-SA 2.0 · Wikimedia Commons

इजरायल और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। यह विवाद वेस्ट बैंक में स्थित यहूदी बस्तियों को लेकर ब्रिटेन द्वारा लिए गए एक हालिया फैसले के बाद शुरू हुआ है। इजरायल ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए ब्रिटेन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।

बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने ब्रिटेन के कॉन्सुलेट को बंद करने का फैसला किया है। यह कदम इजरायल की उस नाराजगी को दर्शाता है जो उसने ब्रिटेन की नीति के प्रति व्यक्त की है। वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों को लेकर ब्रिटेन का रुख इजरायल को स्वीकार्य नहीं है।

यहूदी बस्तियों का मुद्दा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र रहा है। ब्रिटेन ने इन बस्तियों के खिलाफ जो स्टैंड लिया है, उसे इजरायल ने अपने हितों के खिलाफ माना है। इस फैसले के बाद से ही दोनों देशों के बीच बातचीत और कूटनीतिक स्तर पर खटास देखी जा रही है।

इजरायल के इस कदम से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। कॉन्सुलेट बंद करने का निर्णय एक बड़ा कूटनीतिक संकेत है, जो यह बताता है कि इजरायल इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।

फिलहाल, इस मामले पर ब्रिटेन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम को गंभीरता से देखा जा रहा है। वेस्ट बैंक की स्थिति पहले से ही काफी संवेदनशील है और ऐसे फैसलों से वहां तनाव और बढ़ने की आशंका है।

इजरायल का कहना है कि यहूदी बस्तियों को लेकर लिया गया ब्रिटेन का फैसला एकतरफा है। वहीं, ब्रिटेन ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला दिया है। दोनों देशों के बीच यह विवाद आने वाले समय में और भी जटिल हो सकता है।

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के कदम से दोनों देशों के बीच भविष्य में सहयोग की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इजरायल ने अपने कड़े रुख से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी नीतियों पर किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा।

स्रोत

मूल संदर्भ

01BBC News हिंदीमूल रिपोर्ट देखें ↗