इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा कदम: ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में पदाधिकारियों के कार्यकाल पर सरकार से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में लंबे समय से पदों पर काबिज पदाधिकारियों के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने सदस्यों के मतदान के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी स्पष्टीकरण मांगा है। इसके साथ ही, कोर्ट ने 20 अप्रैल 2026 के आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक के लिए रोक लगा दी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के संचालन को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने उन पदाधिकारियों के खिलाफ संज्ञान लिया है जो लंबे समय से इन सोसाइटियों में विभिन्न पदों पर बने हुए हैं।
अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। मुख्य रूप से यह सवाल उठाया गया है कि आखिर कैसे कुछ पदाधिकारी वर्षों तक इन सोसाइटियों के पदों पर काबिज रह सकते हैं। इसके साथ ही, सदस्यों के मतदान के अधिकार से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी अदालत ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने 20 अप्रैल 2026 को जारी किए गए एक आदेश के संचालन पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। यह रोक अगली सुनवाई की तारीख तक प्रभावी रहेगी।
ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में पदाधिकारियों के लंबे कार्यकाल को लेकर अक्सर सदस्यों द्वारा चिंताएं जताई जाती रही हैं। इस मामले में हाईकोर्ट का हस्तक्षेप पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस संबंध में अपना पक्ष रखे ताकि सोसाइटियों के कामकाज में सुधार लाया जा सके। सदस्यों के मतदान के अधिकारों की रक्षा करना इस मामले का एक प्रमुख केंद्र बिंदु है।
अगली सुनवाई में सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले जवाब के आधार पर ही अदालत आगे की दिशा तय करेगी। तब तक, 20 अप्रैल के आदेश पर लगी रोक यथावत बनी रहेगी।
यह मामला राज्य की कई हाउसिंग सोसाइटियों के लिए एक नजीर बन सकता है, जहां पदाधिकारियों के चयन और उनके कार्यकाल को लेकर विवाद की स्थिति बनी रहती है।
