इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अनुकंपा नियुक्ति पर एक माह के नोटिस की शर्त को बताया गलत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नियुक्ति पत्र में शामिल उस शर्त को खारिज कर दिया है, जिसके तहत कर्मचारी को बिना कारण बताए एक माह के नोटिस पर हटाया जा सकता था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृतक आश्रित कोटे के तहत दी गई नौकरी स्वीकृत पद के विरुद्ध होती है, इसलिए इसे मनमाने ढंग से नहीं छीना जा सकता।
VIMARSHNAARAD TVइलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में एक सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने उन नियुक्ति पत्रों की शर्तों को गलत ठहराया है, जिनमें यह प्रावधान था कि कर्मचारी को बिना किसी ठोस कारण के केवल एक माह का नोटिस देकर सेवा से हटाया जा सकता है।
अमर उजाला नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक आश्रित नियमों के तहत दी जाने वाली नियुक्ति एक स्वीकृत पद के विरुद्ध होती है। इसलिए, इस तरह की नियुक्तियों को मनमाने ढंग से समाप्त करना कानूनी रूप से उचित नहीं है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को आर्थिक सहारा देना होता है। यदि नियुक्ति पत्र में ऐसी शर्तें जोड़ी जाती हैं जो कर्मचारी की नौकरी की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं, तो वे नियम के विरुद्ध मानी जाएंगी।
यह मामला तब सामने आया जब नियुक्ति की शर्तों को लेकर कानूनी चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी कर्मचारी को बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए और बिना ठोस आधार के सेवा से नहीं हटाया जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए राहत भरा है जो अनुकंपा के आधार पर सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं। यह निर्णय नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे भविष्य में नियुक्ति पत्र जारी करते समय इन कानूनी पहलुओं का ध्यान रखें। अनुकंपा नियुक्ति को केवल एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसे एक नियमित पद के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।
इस फैसले के बाद अब सरकारी विभागों को अपनी नियुक्ति शर्तों की समीक्षा करनी पड़ सकती है। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी स्पष्ट करती है कि मृतक आश्रित कोटे के तहत मिलने वाली नौकरी के अधिकार को मनमाने नियमों के जरिए सीमित नहीं किया जा सकता।