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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: किराये के घर में हादसे के लिए मकान मालिक को नहीं ठहरा सकते दोषी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि किराये के मकान में किसी दुर्घटना के कारण होने वाली मौत के लिए मकान मालिक को सीधे तौर पर आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष को मकान मालिक की स्पष्ट लापरवाही या चूक के ठोस सबूत पेश करने होंगे। बिना ठोस साक्ष्यों के मकान मालिक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किरायेदारी से जुड़े एक मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि किराये के घर में हुई किसी भी दुर्घटनावश मौत के लिए मकान मालिक को स्वतः ही उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के लिए मकान मालिक को आपराधिक रूप से दोषी मानने के लिए ठोस आधार की आवश्यकता होती है।

न्यायालय के अनुसार, मकान मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए अभियोजन पक्ष को यह साबित करना अनिवार्य है कि घटना के पीछे मकान मालिक की कोई विशिष्ट लापरवाही या चूक थी। यदि ऐसी कोई लापरवाही प्रथमदृष्टया सिद्ध नहीं होती है, तो मकान मालिक को आपराधिक मुकदमे में नहीं घसीटा जा सकता।

अदालत ने इस मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का निर्देश दिया है। यह फैसला उन मकान मालिकों के लिए एक बड़ी राहत है जिन्हें अक्सर किराये के परिसरों में होने वाली अनपेक्षित घटनाओं के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया जाता है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय किरायेदार और मकान मालिक के बीच के संबंधों में स्पष्टता लाएगा। अदालत ने जोर देकर कहा कि केवल किराये पर घर देने मात्र से मकान मालिक को किसी भी दुर्घटना का आपराधिक जिम्मेदार नहीं बनाया जा सकता।

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून में किसी को दोषी ठहराने के लिए साक्ष्यों का होना अनिवार्य है। बिना किसी प्रत्यक्ष प्रमाण के मकान मालिक को प्रताड़ित करना या उन पर आपराधिक आरोप लगाना कानूनी रूप से मान्य नहीं है।

यह निर्णय न्यायपालिका की उस सोच को दर्शाता है जिसमें किसी भी व्यक्ति को बिना ठोस सबूतों के आपराधिक मामले में फंसाने से रोकने का प्रयास किया जाता है। भविष्य में इसी तरह के मामलों में यह आदेश एक नजीर के रूप में काम करेगा।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी संकेत दिया कि मकान मालिक की जवाबदेही केवल तभी बनती है जब वह अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहा हो। सामान्य दुर्घटनाओं को आपराधिक लापरवाही के दायरे में नहीं रखा जा सकता।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराजमूल रिपोर्ट देखें ↗