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इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी: लेखपाल भर्ती में दिव्यांगों को आरक्षण से वंचित रखना सरकार की बड़ी चूक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लेखपाल भर्ती प्रक्रिया में विशिष्ट दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ न देने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने इसे सरकार की त्रुटि माना है। यह मामला चलने संबंधी दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों के अधिकारों से जुड़ा है, जिन्हें भर्ती नियमों के तहत आरक्षण से बाहर रखा गया था। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब भर्ती प्रक्रिया में सुधार की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लेखपाल भर्ती परीक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान विशिष्ट दिव्यांगता, विशेषकर चलने-फिरने में अक्षम अभ्यर्थियों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखना सरकार की एक बड़ी गलती है। यह मामला राज्य में चल रही लेखपाल भर्ती से जुड़ा है, जिसमें दिव्यांग उम्मीदवारों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई थी।

अदालत के समक्ष यह मुद्दा तब आया जब कुछ अभ्यर्थियों ने भर्ती नियमों में दिव्यांगों के प्रति बरती गई अनदेखी को चुनौती दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि नियमों में स्पष्टता का अभाव था, जिसके कारण एक विशेष वर्ग के दिव्यांगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सका। न्यायाधीशों ने इस स्थिति को प्रशासनिक चूक करार दिया है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि कोर्ट की यह टिप्पणी दिव्यांगजनों के लिए एक बड़ी राहत है। सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों के लिए निर्धारित कोटे का पालन करना अनिवार्य है, और किसी भी श्रेणी को मनमाने ढंग से बाहर करना नियमों के विरुद्ध है। कोर्ट ने सरकार को इस मामले में अपनी नीति की समीक्षा करने के संकेत दिए हैं।

इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए कई दिव्यांग अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि उन्हें आवेदन के समय ही आरक्षण का विकल्प चुनने में कठिनाई हुई थी। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या कदम उठाती है। क्या सरकार भर्ती नियमों में संशोधन करेगी या प्रभावित उम्मीदवारों को राहत देने के लिए कोई विशेष प्रावधान करेगी, यह भविष्य में स्पष्ट होगा।

फिलहाल, इस मामले ने प्रशासनिक स्तर पर भर्ती नियमों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ताओं ने कोर्ट के इस रुख का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि भविष्य की भर्तियों में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को भविष्य में दिव्यांगों के आरक्षण संबंधी नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। यह निर्णय न केवल लेखपाल भर्ती बल्कि अन्य सरकारी परीक्षाओं के लिए भी एक नजीर बन सकता है।

अंततः, यह मामला सरकारी तंत्र में संवेदनशीलता और नियमों के सही क्रियान्वयन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। दिव्यांग अभ्यर्थियों को अब न्याय मिलने की उम्मीद है, जिससे उनकी सरकारी सेवा में शामिल होने की राह आसान हो सकती है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराजमूल रिपोर्ट देखें ↗