इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर रंगदारी मांगने के आरोपी को दी बड़ी राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम लेकर चिकित्सकों और प्रमुख नागरिकों से दो करोड़ रुपये की जबरन वसूली करने वाले एक आरोपी को जमानत प्रदान कर दी है। अमर उजाला नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने मामले की गंभीरता और कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए यह राहत दी है। आरोपी पर बिश्नोई के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को डराने-धमकाने का आरोप था।
VIMARSHNAARAD TVइलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए अलीगढ़ के एक आरोपी को जमानत दे दी है। उस पर आरोप था कि उसने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम लेकर शहर के प्रतिष्ठित लोगों और डॉक्टरों से करीब दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी। अमर उजाला नेटवर्क की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने बिश्नोई के नाम का डर दिखाकर लोगों से अवैध वसूली करने की कोशिश की थी।
अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को सुना और अंततः जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया। आरोपी पर आरोप था कि उसने बिश्नोई के नाम का इस्तेमाल कर अलीगढ़ के कई प्रमुख नागरिकों को निशाना बनाया था। इस मामले ने शहर में काफी चर्चा बटोरी थी क्योंकि इसमें एक कुख्यात गैंगस्टर का नाम शामिल था।
कानूनी प्रक्रिया के तहत, आरोपी को जमानत मिलने के बाद अब उसे अदालत की शर्तों का पालन करना होगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि जमानत के लिए अदालत ने क्या विशिष्ट शर्तें रखी हैं। इस मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसके बाद जमानत पर सुनवाई हुई।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना अलीगढ़ के निवासियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी। लोगों को डराने के लिए गैंगस्टर के नाम का उपयोग करना एक गंभीर अपराध माना जाता है। अदालत ने मामले के तथ्यों पर गौर करने के बाद ही आरोपी को राहत देने का निर्णय लिया है।
इस मामले में अभी आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी। अदालत का यह निर्णय आरोपी के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, इस मामले में आरोपी को मिली जमानत ने कानूनी गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। यह मामला स्पष्ट करता है कि कैसे गैंगस्टर के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को भयभीत किया जा रहा था।
अदालत ने इस मामले में जमानत देते समय कानून के प्रावधानों का पालन किया है। अब देखना यह होगा कि आगे की सुनवाई में क्या नए तथ्य सामने आते हैं।