ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच ब्रिक्स देशों के आपसी मतभेद आए सामने, नई वैश्विक व्यवस्था पर सहमति का अभाव
बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स समूह के सदस्य देश एक नई वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता पर तो एकमत हैं, लेकिन इसे हासिल करने के तरीकों और भविष्य की दिशा को लेकर उनके बीच गहरे मतभेद हैं। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव ने इस गुट की आंतरिक एकता की सीमाओं को उजागर कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि साझा लक्ष्यों के बावजूद सदस्य देशों के बीच रणनीतिक तालमेल का अभी भी अभाव है।
VIMARSHNAARAD TVब्रिक्स समूह के सदस्य देशों के बीच एक नई वैश्विक व्यवस्था बनाने की इच्छा तो साझा है, लेकिन बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट बताती है कि इस लक्ष्य को पाने के तौर-तरीकों पर उनके बीच गहरा मतभेद है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने इस समूह की एकता की पोल खोल दी है और रिश्तों में आई दरार को स्पष्ट कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिक्स के सदस्य इस बात पर तो सहमत हैं कि वर्तमान वैश्विक ढांचे में बदलाव की जरूरत है, लेकिन वे इस बात पर एक राय नहीं बना पा रहे हैं कि भविष्य की व्यवस्था कैसी होनी चाहिए। इस वैचारिक मतभेद के कारण समूह के भीतर रणनीतिक तालमेल की कमी साफ देखी जा सकती है।
ईरान के साथ चल रहे मौजूदा संघर्ष ने ब्रिक्स देशों के सामने एक कठिन चुनौती पेश की है। सदस्य देशों के अलग-अलग भू-राजनीतिक हित और प्राथमिकताएं इस बात में बाधा बन रही हैं कि वे किसी एक ठोस नीति पर काम कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स के भीतर मौजूद ये दरारें केवल एक क्षेत्रीय मुद्दे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये समूह की दीर्घकालिक प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाती हैं। जब तक सदस्य देश अपने आपसी मतभेदों को दूर नहीं करते, तब तक एक नई वैश्विक व्यवस्था का सपना अधूरा ही नजर आता है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि ब्रिक्स के भीतर की यह खींचतान केवल ईरान के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समूह के विस्तार और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर भी है। सदस्य देशों के बीच विश्वास की कमी और अलग-अलग दृष्टिकोण इस मंच की एकता को कमजोर कर रहे हैं।
ब्रिक्स के भविष्य को लेकर उठ रहे इन सवालों के बीच, यह स्पष्ट है कि समूह को अपनी आंतरिक एकजुटता बनाए रखने के लिए एक साझा दृष्टिकोण की आवश्यकता है। वर्तमान में, सदस्य देशों के बीच का यह वैचारिक फासला उन्हें एक मजबूत वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने से रोक रहा है।
अंत में, बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि ब्रिक्स के सदस्य देशों के लिए एक नई वैश्विक व्यवस्था की दिशा तय करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जब तक वे अपने मतभेदों को सुलझाकर एक साझा रणनीति नहीं अपनाते, तब तक उनकी एकता केवल एक सैद्धांतिक चर्चा तक ही सीमित रहेगी।