उत्तर प्रदेश: करोड़ों के टेंडर में फर्जीवाड़े का खुलासा, बीएसए के जाली हस्ताक्षर से मचा हड़कंप
अलीगढ़ और बदायूं की दो फर्मों द्वारा करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, बीएसए ने अपने ही फर्जी हस्ताक्षर देखकर मामले की जांच शुरू कर दी है। ठेकेदारों ने दस्तावेजों में हेरफेर कर सरकारी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की थी, जिससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जहां करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल करने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लिया गया। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, अलीगढ़ और बदायूं की दो फर्मों के ठेकेदारों ने टेंडर प्रक्रिया में धांधली की है। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने टेंडर दस्तावेजों पर अपने ही फर्जी हस्ताक्षर देखे।
अधिकारियों के अनुसार, इन फर्मों ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे, जो पूरी तरह से फर्जी पाए गए। इन प्रमाण पत्रों को तैयार करने के लिए न केवल जाली दस्तावेजों का उपयोग किया गया, बल्कि उच्च अधिकारियों के हस्ताक्षर भी कूटरचित तरीके से बनाए गए थे। बीएसए ने जब इन दस्तावेजों की जांच की, तो उन्हें अपनी पहचान और हस्ताक्षर में स्पष्ट अंतर नजर आया।
इस खुलासे के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ठेकेदारों ने करोड़ों रुपये के सरकारी अनुबंधों को हथियाने के लिए एक सुनियोजित साजिश रची थी। फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के माध्यम से इन फर्मों ने खुद को योग्य साबित करने का प्रयास किया, ताकि वे टेंडर प्रक्रिया में सफल हो सकें।
शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि इस तरह की धांधली से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। बीएसए ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित फर्मों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। फिलहाल, दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
यह घटना सरकारी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती है। विभाग अब सभी पुराने और वर्तमान टेंडरों की दोबारा समीक्षा करने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की जालसाजी को रोकने के लिए डिजिटल सत्यापन और सख्त निगरानी प्रणाली की तत्काल आवश्यकता है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों को भी सूचित किए जाने की संभावना है। ठेकेदारों द्वारा अपनाई गई इस कार्यप्रणाली ने न केवल नियमों का उल्लंघन किया है, बल्कि सरकारी कामकाज की विश्वसनीयता को भी प्रभावित किया है।
फिलहाल, संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए टेंडर प्रक्रिया में और अधिक कड़े सुरक्षा मानक लागू किए जाएंगे।