उत्तर प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे में अब ड्रग फ्री जोन बनाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के स्कूलों और कॉलेजों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव ने शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को ड्रग फ्री जोन घोषित करने और चिन्हित हॉट स्पॉट की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, पूरे प्रदेश में छात्रों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाएंगे।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश में युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को ड्रग फ्री जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के मादक पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
राज्य के मुख्य सचिव ने इस संबंध में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रदेश भर में उन स्थानों को चिन्हित किया जाए जो नशीले पदार्थों की बिक्री के लिए हॉट स्पॉट बने हुए हैं। इन क्षेत्रों की निरंतर निगरानी की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोका जा सके।
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को नशे के जाल से सुरक्षित रखना है। इस पहल के तहत केवल प्रतिबंध ही नहीं लगाए जाएंगे, बल्कि व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। प्रदेश भर के शैक्षणिक संस्थानों में नशा मुक्ति के प्रति छात्रों को शिक्षित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि शैक्षणिक परिसरों के आसपास का वातावरण पूरी तरह से सुरक्षित और नशा मुक्त हो। इस अभियान के माध्यम से सरकार समाज में नशे के खिलाफ एक कड़ा संदेश देना चाहती है।
स्थानीय स्तर पर पुलिस और प्रशासन को मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि इन हॉट स्पॉट पर प्रभावी कार्रवाई हो सके। यह कदम राज्य सरकार की नशा मुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आने वाले समय में इन क्षेत्रों में निगरानी और सख्त की जाएगी। सरकार का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास का माहौल यदि स्वच्छ और नशा मुक्त होगा, तो इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा।
इस अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।