उत्तर प्रदेश के 20 जिलों में लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप, हरियाणा सीमा से सटे इलाकों में अधिक खतरा
उत्तर प्रदेश में पशुओं के बीच लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। राज्य के 20 जिले वर्तमान में इस बीमारी की चपेट में हैं। विशेष रूप से हरियाणा की सीमा से लगे जिलों में संक्रमण का असर अधिक देखा जा रहा है। पशुपालन विभाग की टीमें सक्रिय हो गई हैं और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव व उपचार के प्रयास तेज कर दिए गए हैं ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश में पशुओं में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का खतरा बढ़ गया है। राज्य के कुल 20 जिलों में इस बीमारी के मामले सामने आए हैं, जिससे पशुपालकों में चिंता का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा की सीमा से सटे जिलों में लंपी वायरस का प्रकोप सबसे अधिक गंभीर है। इन क्षेत्रों में संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पशुपालन विभाग ने प्रभावित जिलों में बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं।
संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए पशुओं का टीकाकरण और आइसोलेशन जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बीमारी के लक्षणों को पहचानना और समय पर उपचार कराना ही बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर पशुओं की जांच कर रही हैं। जिन पशुओं में लंपी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उन्हें स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा, प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई और कीटनाशकों के छिड़काव पर भी जोर दिया जा रहा है।
पशुपालकों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि यदि उनके पशुओं में बुखार, शरीर पर गांठें या अन्य लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें।
राज्य सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित जिलों के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों को अलर्ट पर रखा है। दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उपचार में कोई बाधा न आए।
फिलहाल, हरियाणा सीमा से लगे जिलों में विशेष निगरानी दल तैनात किए गए हैं। इन दलों का मुख्य कार्य संक्रमण के नए मामलों की पहचान करना और उन्हें फैलने से पहले ही नियंत्रित करना है।