उत्तर प्रदेश: पंचायती राज विभाग में टेंडर विवाद गरमाया, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा मामला
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज विभाग में डिजिटल लाइब्रेरी के टेंडर आवंटन को लेकर आंतरिक मतभेद सामने आए हैं। विभाग के भीतर उपजे इस विवाद की गूंज अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय तक पहुंच गई है। मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस संबंध में एक पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि टेंडर प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों और नेतृत्व के बीच खींचतान चल रही है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश के पंचायती राज विभाग में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। विभाग के भीतर डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना के लिए जारी किए गए टेंडरों को लेकर विवाद गहरा गया है। यह मामला अब इतना बढ़ चुका है कि इसकी जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाई गई है। विभाग में मची इस आपसी तनातनी ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री को एक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने विभाग में चल रही टेंडर संबंधी प्रक्रियाओं और उत्पन्न हुए विवादों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि टेंडर आवंटन की प्रक्रिया को लेकर मतभेद काफी समय से चल रहे थे।
डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना के लिए निर्धारित टेंडर प्रक्रिया को लेकर विभाग के भीतर अलग-अलग राय सामने आई है। इस खींचतान के कारण कार्य की गति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। मंत्री द्वारा उठाए गए इस कदम को विभाग में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में किन विशिष्ट बिंदुओं का उल्लेख किया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि विभाग के भीतर के इस विवाद ने उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता पैदा कर दी है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा लिए जाने वाले आगामी निर्णय पर टिकी हैं।
पंचायती राज विभाग में इस तरह की आंतरिक कलह पहले भी चर्चा का विषय रही है, लेकिन टेंडर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सीधे मुख्यमंत्री तक बात पहुंचना इसे गंभीर बनाता है। विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार और विवादों के निपटारे के लिए अब उच्च स्तरीय जांच या निर्देश की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल, विभाग के अधिकारी इस मामले पर अधिकृत रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं। मंत्री का पत्र मिलने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय इस पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करेगा। उम्मीद है कि जल्द ही इस विवाद का कोई समाधान निकाला जाएगा ताकि डिजिटल लाइब्रेरी जैसी महत्वपूर्ण जनहित योजनाएं बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सकें।