उत्तर प्रदेश में अफसरों के वित्तीय अधिकार बढ़े, अब पांच करोड़ तक की परियोजनाओं को दे सकेंगे मंजूरी
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के अभियंत्रण विभागों में कार्यरत अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि की है। अब ये अधिकारी निर्माण कार्यों से जुड़ी पांच करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को स्वयं मंजूरी दे सकेंगे। इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी निर्माण कार्यों में तेजी लाना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव राज्य के विभिन्न निर्माण विभागों पर लागू होगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे और निर्माण कार्यों में गति लाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अमर उजाला ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के विभिन्न अभियंत्रण विभागों में तैनात अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों को बढ़ा दिया गया है।
इस नए बदलाव के बाद, अब संबंधित अधिकारी पांच करोड़ रुपये तक की लागत वाली निर्माण परियोजनाओं को अपनी स्वीकृति दे सकेंगे। पहले इन कार्यों के लिए उच्च स्तर से मंजूरी लेने की आवश्यकता होती थी, जिससे कई बार परियोजनाओं में देरी होती थी।
सरकार का मानना है कि इस कदम से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और निर्माण कार्यों का क्रियान्वयन समयबद्ध तरीके से हो सकेगा। यह निर्णय विशेष रूप से उन विभागों के लिए प्रभावी होगा जो राज्य में सड़कों, पुलों और अन्य नागरिक निर्माण कार्यों की देखरेख करते हैं।
प्रशासनिक सुधारों के तहत लिया गया यह निर्णय राज्य के विकास कार्यों को गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल फाइलों का निपटारा जल्दी होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जा सकेगा।
अमर उजाला के अनुसार, यह अधिकार वृद्धि अभियंत्रण विभागों के लिए लागू की गई है। इससे अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी क्योंकि अब वे सीधे तौर पर पांच करोड़ तक के कार्यों के लिए जिम्मेदार होंगे।
राज्य सरकार ने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। संबंधित विभागों को अब अपनी कार्यप्रणाली में इस नए वित्तीय ढांचे को शामिल करने के लिए कहा गया है।
उम्मीद जताई जा रही है कि इस बदलाव से सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और गति में सुधार देखने को मिलेगा। यह निर्णय राज्य के विभिन्न जिलों में चल रही विकास परियोजनाओं के लिए काफी मददगार साबित होगा।
