ताज़ा अपडेटउत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी आशीष गोयल का तबादला, ऊर्जा मंत्री के साथ लंबे समय से चल रहा था विवाद
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उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी आशीष गोयल का तबादला, ऊर्जा मंत्री के साथ लंबे समय से चल रहा था विवाद

उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी डॉ. आशीष गोयल का स्थानांतरण कर दिया गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बिजली की लचर व्यवस्था और बार-बार होने वाली कटौती को नियंत्रित करने में वे विफल रहे थे। ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने पूर्व में उन पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए थे, जिसके चलते दोनों के बीच लंबे समय से मतभेद की स्थिति बनी हुई थी।

उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी आशीष गोयल का तबादला, ऊर्जा मंत्री के साथ लंबे समय से चल रहा था विवाद
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: Adam Jones from Kelowna, BC, Canada · CC BY-SA 2.0 · Wikimedia Commons

उत्तर प्रदेश प्रशासन में एक बड़े बदलाव के तहत आईएएस अधिकारी डॉ. आशीष गोयल का तबादला कर दिया गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम राज्य में बिजली आपूर्ति की खराब स्थिति और गांवों में हो रही लगातार बिजली कटौती के मद्देनजर उठाया गया है। बताया जा रहा है कि डॉ. गोयल इन चुनौतियों से निपटने में प्रभावी साबित नहीं हो रहे थे।

इस प्रशासनिक फेरबदल के पीछे ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा के साथ उनके लंबे समय से चल रहे मतभेदों को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा मंत्री कई मौकों पर डॉ. गोयल के कामकाज के तरीकों पर सार्वजनिक रूप से असंतोष जता चुके थे।

ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने डॉ. गोयल के कार्यकाल के दौरान उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। मंत्री ने उन पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और विभागीय कार्यों में लापरवाही बरतने की बात कही थी। इन तीखे बयानों के बावजूद डॉ. गोयल काफी समय तक अपने पद पर बने रहने में सफल रहे थे।

राज्य के बिजली विभाग में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर आम जनता में भी काफी नाराजगी देखी जा रही थी। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कटौती ने लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित किया था, जिसकी जिम्मेदारी अंततः विभाग के शीर्ष अधिकारियों पर ही आती है।

हालांकि, डॉ. गोयल ने इन आरोपों और विवादों के बीच अपने पद पर अपनी पकड़ बनाए रखी थी। प्रशासनिक गलियारों में इस तबादले को ऊर्जा विभाग में सुधार लाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

फिलहाल, सरकार की ओर से इस स्थानांतरण के बाद विभाग की कार्यप्रणाली में बदलाव की उम्मीद की जा रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए अधिकारी बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम राज्य सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और ऊर्जा विभाग के भीतर चल रहे आंतरिक संघर्षों को दर्शाता है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊमूल रिपोर्ट देखें ↗