उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए लागू होगा यूनिक कोड, तीन स्तरों पर होगी सख्त निगरानी
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और तैनाती की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने जा रही है। अब प्रत्येक कर्मी को एक विशिष्ट यूनिक कोड आवंटित किया जाएगा। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों के स्तर पर की जाएगी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य कार्यबल के प्रबंधन में सुधार लाना और प्रशासनिक जवाबदेही को सुनिश्चित करना है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के विभिन्न विभागों में तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब इन सभी कर्मियों की पहचान के लिए एक यूनिक कोड प्रणाली लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था के माध्यम से सरकार भर्ती से लेकर तैनाती तक की प्रक्रिया पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य आउटसोर्सिंग के जरिए काम करने वाले कर्मचारियों का सटीक डेटाबेस तैयार करना है। यूनिक कोड के माध्यम से प्रत्येक कर्मी का विवरण डिजिटल रूप में उपलब्ध होगा, जिससे उनकी उपस्थिति और कार्यस्थल पर उनकी मौजूदगी की निगरानी करना आसान हो जाएगा।
प्रशासनिक स्तर पर इस व्यवस्था को तीन चरणों में लागू किया जाएगा। सबसे निचले स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक इसकी निगरानी की जाएगी। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों को इस पूरी प्रक्रिया के सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि भर्ती नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
इस नई निगरानी प्रणाली से आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रबंधन में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल कर्मचारियों का विवरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने में भी मदद मिलेगी।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करें। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी भी कर्मी को यूनिक कोड के साथ आधिकारिक रूप से पंजीकृत माना जाएगा।
यह कदम राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत सरकारी कामकाज में आउटसोर्सिंग के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों को अधिक जवाबदेह बनाया जा रहा है। आने वाले समय में इस डेटाबेस का उपयोग अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी किया जा सकता है।
फिलहाल, संबंधित विभागों को इस नई व्यवस्था के लिए आवश्यक तकनीकी तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि डेटा का सही संकलन हो ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की विसंगति न रहे।
