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उत्तर प्रदेश में गहराया बिजली संकट, कोयले की कमी और बारिश के कारण गांवों में कटौती बढ़ी

उत्तर प्रदेश में बिजली की भारी किल्लत देखी जा रही है। कोयले की अनुपलब्धता और लगातार बारिश के चलते तकनीकी खराबी के कारण ग्रामीण इलाकों में अब केवल आठ घंटे ही बिजली मिल पा रही है। इस स्थिति ने राज्य की ऊर्जा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे आम जनजीवन काफी प्रभावित हो रहा है।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बिजली की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब दिन में केवल आठ घंटे ही बिजली मिल पा रही है। इस संकट के पीछे मुख्य रूप से कोयले की कमी और खराब मौसम को जिम्मेदार माना जा रहा है।

अमर उजाला नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, कोयले की पर्याप्त आपूर्ति न होने से बिजली उत्पादन केंद्रों पर दबाव बढ़ गया है। कोयले का स्टॉक कम होने से उत्पादन क्षमता में गिरावट आई है, जिसका सीधा असर वितरण व्यवस्था पर पड़ रहा है।

इसके अतिरिक्त, राज्य में हो रही लगातार बारिश ने स्थिति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। बारिश के कारण बिजली लाइनों में ट्रिपिंग की समस्या बढ़ गई है, जिससे आपूर्ति में बार-बार बाधा उत्पन्न हो रही है।

बिजली कटौती के कारण ग्रामीण इलाकों में कामकाज पर बुरा असर पड़ा है। किसानों को सिंचाई और अन्य कार्यों के लिए बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, घरेलू उपभोक्ताओं को भी भीषण गर्मी और उमस के बीच अंधेरे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

ऊर्जा विभाग के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करना और दूसरी तरफ बारिश से प्रभावित लाइनों को दुरुस्त करना प्राथमिकता बनी हुई है। हालांकि, अभी तक स्थिति में कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला है।

इस संकट ने राज्य की बिजली प्रबंधन प्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली की कटौती से उनका दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

अधिकारियों द्वारा स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कोयले की कमी और मौसम की मार के चलते राहत मिलने में समय लग सकता है। फिलहाल, ग्रामीण जनता को बिजली की भारी किल्लत के बीच ही अपना समय व्यतीत करना पड़ रहा है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊमूल रिपोर्ट देखें ↗