उत्तर प्रदेश में जारी 131 जन्म प्रमाणपत्रों के जरिए देशभर में फर्जी आधार कार्ड बनाने का बड़ा खुलासा
उत्तर प्रदेश में जारी किए गए 131 जन्म प्रमाणपत्रों का उपयोग करके देश भर में फर्जी आधार कार्ड बनाने का मामला सामने आया है। सीबीआई ने इस गंभीर धोखाधड़ी की जांच के लिए चीफ रजिस्ट्रार (जन्म एवं मृत्यु) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस निर्देश के बाद बागपत, मेरठ, सहारनपुर और बिजनौर सहित प्रदेश के 21 जिलों में प्रशासन ने गहन जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जारी किए गए जन्म प्रमाणपत्रों का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर फर्जी आधार कार्ड बनाए जाने का मामला प्रकाश में आया है। सीबीआई ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए चीफ रजिस्ट्रार (जन्म एवं मृत्यु) को पत्र लिखकर सभी संबंधित प्रमाणपत्रों की जांच करने और रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। यह धोखाधड़ी न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
सीबीआई की सक्रियता के बाद प्रदेश के 21 जिलों में हड़कंप मच गया है। इन जिलों में बागपत, मेरठ, सहारनपुर और बिजनौर प्रमुख रूप से शामिल हैं। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग अब उन 131 जन्म प्रमाणपत्रों की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं, जिनके आधार पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह ने सुनियोजित तरीके से सरकारी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया है।
जांच के दायरे में आए इन प्रमाणपत्रों की सत्यता की पुष्टि के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या ये प्रमाणपत्र किसी मिलीभगत से जारी किए गए थे या फिर इनमें तकनीकी खामियों का फायदा उठाया गया। सीबीआई की रिपोर्ट के बाद ही इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान स्पष्ट हो सकेगी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इन फर्जी आधार कार्डों का उपयोग देश के विभिन्न हिस्सों में किया जा रहा था, जिससे पहचान की चोरी का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने अब जन्म-मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कड़े कदम उठाने का संकेत दिया है। संबंधित जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रिकॉर्ड का मिलान करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करें।
यह मामला तब सामने आया जब केंद्रीय एजेंसियों ने आधार कार्ड के डेटा और जन्म प्रमाणपत्रों के बीच विसंगतियां पाईं। सीबीआई ने अब तक की जांच में पाया कि एक ही श्रृंखला के प्रमाणपत्रों का उपयोग करके अलग-अलग राज्यों में आधार कार्ड बनवाए गए। इस खुलासे के बाद से ही पूरे प्रशासनिक अमले में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
स्थानीय स्तर पर जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि वे सीबीआई को हर संभव सहयोग प्रदान कर रहे हैं। आने वाले दिनों में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, क्योंकि जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के बहकावे में न आएं।
फिलहाल, बागपत सहित अन्य 21 जिलों में संबंधित विभागों के रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है। सीबीआई की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही इस बड़े फर्जीवाड़े के दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी। यह घटना सरकारी प्रणालियों में पारदर्शिता और सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करती है।