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उत्तर प्रदेश में डीएलएड कोर्स के प्रति घटता रुझान, 25 से अधिक निजी कॉलेजों ने मान्यता छोड़ने का लिया निर्णय

उत्तर प्रदेश में परिषदीय स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए डीएलएड कोर्स में छात्रों की रुचि लगातार कम हो रही है। प्रवेश न मिलने के कारण गौतमबुद्धनगर, आगरा, उन्नाव और कानपुर सहित कई जिलों के 25 से अधिक निजी शिक्षण संस्थानों ने अपनी मान्यता वापस करने के लिए आवेदन किया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इन कॉलेजों में एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया है।

उत्तर प्रदेश में डीएलएड कोर्स के प्रति घटता रुझान, 25 से अधिक निजी कॉलेजों ने मान्यता छोड़ने का लिया निर्णय
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: Jain.tanuj · CC BY-SA 3.0 · Wikimedia Commons

उत्तर प्रदेश में डीएलएड (D.El.Ed) पाठ्यक्रम के प्रति छात्रों का मोहभंग होता दिखाई दे रहा है। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक बनने की राह आसान करने वाले इस कोर्स में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई निजी कॉलेजों में एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित 25 से अधिक निजी डीएलएड कॉलेजों ने अब अपनी मान्यता समाप्त करने का मन बना लिया है। इन संस्थानों ने अपनी मान्यता वापस करने के लिए आधिकारिक तौर पर आवेदन भी कर दिया है।

प्रभावित कॉलेजों में गौतमबुद्धनगर, आगरा, उन्नाव और कानपुर जैसे प्रमुख जिलों के संस्थान शामिल हैं। इन कॉलेजों का कहना है कि छात्रों की अनुपलब्धता के कारण उनके लिए संस्थान का संचालन करना आर्थिक रूप से कठिन हो गया है।

शिक्षक बनने के इच्छुक युवाओं के बीच इस कोर्स की घटती लोकप्रियता शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। पहले डीएलएड कोर्स में प्रवेश के लिए भारी प्रतिस्पर्धा होती थी, लेकिन अब कई सीटें खाली रह जाती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य करियर विकल्पों की ओर छात्रों का झुकाव और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी अनिश्चितताएं इस गिरावट के मुख्य कारण हो सकते हैं।

मान्यता छोड़ने की प्रक्रिया शुरू करने वाले इन कॉलेजों के सामने अब अपने बुनियादी ढांचे और संसाधनों को अन्य कार्यों में उपयोग करने की चुनौती होगी।

फिलहाल, शिक्षा विभाग की ओर से इन आवेदनों पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह स्थिति राज्य में शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों के भविष्य पर भी सवाल खड़े कर रही है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराजमूल रिपोर्ट देखें ↗