उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर छेड़ा अभियान
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के शिक्षकों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग तेज कर दी है। इसके तहत सोशल मीडिया पर एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही, शिक्षक अपनी मांगों के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए शिक्षक दिवस के अवसर पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। यह मांग मुख्य रूप से उन शिक्षकों के लिए है जिनकी नियुक्ति 1 अप्रैल 2005 के बाद हुई है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षकों ने अपनी पुरानी पेंशन की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले शिक्षक एकजुट होकर सरकार से पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन को गति देने के लिए शिक्षकों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया है, जहां वे अपनी बात मजबूती से रख रहे हैं।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ दिलाना है, जिनकी नियुक्तियां 1 अप्रैल 2005 के बाद हुई थीं, जबकि उनके पदों के लिए विज्ञापन उस तारीख से पहले जारी किए गए थे। शिक्षकों का तर्क है कि वे पुरानी पेंशन के हकदार हैं और सरकार को इस विसंगति को दूर करना चाहिए।
विरोध प्रदर्शन के अगले चरण में, शिक्षक आगामी शिक्षक दिवस को एक अलग अंदाज में मनाएंगे। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने निर्णय लिया है कि इस दिन सभी शिक्षक काली पट्टी बांधकर अपनी ड्यूटी करेंगे। यह प्रतीकात्मक विरोध सरकार को उनकी लंबित मांगों की याद दिलाने के लिए किया जा रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। सोशल मीडिया पर चल रहे इस अभियान के माध्यम से वे प्रदेश भर के शिक्षकों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहे हैं।
अमर उजाला ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षक अपनी मांगों को लेकर काफी गंभीर हैं और वे आने वाले दिनों में और भी कड़े कदम उठाने की चेतावनी दे रहे हैं। फिलहाल, पूरा ध्यान सोशल मीडिया कैंपेन और शिक्षक दिवस पर होने वाले विरोध प्रदर्शन पर केंद्रित है।
यह मामला उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षक संगठनों का मानना है कि पुरानी पेंशन उनकी सेवानिवृत्ति के बाद की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। अब देखना यह होगा कि सरकार शिक्षकों की इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।