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उत्तर प्रदेश में बिजली चोरी पर लगा अंकुश, विशेष अभियान के जरिए सरकारी खजाने में आए 614 करोड़

उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। राज्य में बिजली चोरी की घटनाओं में 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने 372 फीडरों को लक्षित कर बकाया बिलों की वसूली की, जिससे 614.86 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इस पहल से सभी विद्युत निगमों को आर्थिक नुकसान कम करने में मदद मिली है।

उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चलाए गए एक विशेष अभियान ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य भर में बिजली चोरी के मामलों में लगभग 18 प्रतिशत की कमी देखी गई है। यह सुधार विभाग द्वारा हाल ही में अपनाई गई सख्त निगरानी और वसूली नीतियों का परिणाम माना जा रहा है।

अधिकारियों ने इस अभियान के तहत राज्य के 372 विद्युत फीडरों को विशेष रूप से चिह्नित किया था। इन क्षेत्रों में बिजली के अवैध उपयोग और मीटर से छेड़छाड़ की शिकायतों पर गहन जांच की गई। इस प्रक्रिया के दौरान उन उपभोक्ताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया जो लंबे समय से अपने बिजली बिलों का भुगतान नहीं कर रहे थे।

अभियान के दौरान विभाग ने बकाया राशि की वसूली के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार, इस कवायद से सरकारी खजाने में 614.86 करोड़ रुपये की राशि जमा हुई है। यह वसूली न केवल राजस्व बढ़ाने में सहायक रही है, बल्कि उपभोक्ताओं के बीच समय पर बिल जमा करने के प्रति जागरूकता भी पैदा की है।

राज्य के सभी विद्युत निगमों में इस अभियान का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बिजली चोरी में कमी आने से निगमों को होने वाले तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान (लाइन लॉस) में भी गिरावट दर्ज की गई है। इससे बिजली वितरण की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जगी है।

विद्युत विभाग के सूत्रों का कहना है कि भविष्य में भी इसी तरह की निगरानी जारी रहेगी ताकि बिजली चोरी की समस्या को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सके। फीडर-वार डेटा का विश्लेषण करके उन क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है जहां अभी भी नुकसान का स्तर अधिक बना हुआ है।

यह पहल उत्तर प्रदेश सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत बिजली व्यवस्था को पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे वैध कनेक्शन लें और नियमित रूप से बिल का भुगतान करें ताकि निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

कुल मिलाकर, यह अभियान राज्य के बिजली क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक कदम साबित हुआ है। राजस्व में हुई इस वृद्धि से बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और नई परियोजनाओं को गति मिलने की संभावना है, जिससे अंततः आम जनता को ही लाभ होगा।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊमूल रिपोर्ट देखें ↗