उत्तर प्रदेश में भाजपा को रोकने के लिए ओवैसी की नई रणनीति, गठबंधन के संकेत दिए
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कानपुर में आगामी चुनावों को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए उनकी पार्टी किसी भी दल के साथ गठबंधन करने को तैयार है। ओवैसी ने संकेत दिया कि इस संबंध में बातचीत चल रही है और 2 अक्टूबर 2026 को गठबंधन के बारे में आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
VIMARSHNAARAD TVकानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर अपनी भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य राज्य में भाजपा को तीसरी बार सरकार बनाने से रोकना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ओवैसी ने किसी भी राजनीतिक दल के साथ हाथ मिलाने की इच्छा जताई है।
ओवैसी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी गठबंधन के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में विभिन्न दलों के साथ बातचीत का सिलसिला जारी है। हालांकि, उन्होंने अभी किसी विशिष्ट पार्टी का नाम नहीं लिया है, लेकिन उनके बयान से साफ है कि वे भाजपा के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाने की कोशिश में हैं।
गठबंधन को लेकर उन्होंने एक महत्वपूर्ण समय सीमा का भी संकेत दिया है। ओवैसी के अनुसार, इस गठबंधन से जुड़ी औपचारिक जानकारी 2 अक्टूबर 2026 को साझा की जाएगी। उस दिन वे अपने सहयोगियों और चुनावी रणनीति के बारे में विस्तार से बात करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का यह कदम उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। एआईएमआईएम की सक्रियता से राज्य के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में वोटों का ध्रुवीकरण देखने को मिल सकता है।
ओवैसी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य के सभी प्रमुख दल अपनी चुनावी तैयारियों में जुटे हैं। भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए विपक्षी खेमे में चल रही हलचल के बीच ओवैसी की यह घोषणा काफी अहम मानी जा रही है।
पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के विकास और सामाजिक न्याय के लिए भाजपा को सत्ता से दूर रखना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी राज्य में एक विकल्प के रूप में उभर रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ओवैसी के इस प्रस्ताव पर अन्य विपक्षी दल क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल, 2 अक्टूबर की तारीख राज्य की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।