उत्तर प्रदेश में 'भारत टैक्सी' सेवा का शुभारंभ, लखनऊ सहित पांच प्रमुख शहरों में मिली सुविधा
केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने उत्तर प्रदेश में 'भारत टैक्सी' सेवा का औपचारिक उद्घाटन किया। यह सेवा लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में शुरू की गई है। 'ड्राइवर ही मालिक है' के सिद्धांत पर आधारित इस पहल का उद्देश्य ड्राइवरों को उनकी कमाई का अधिकतम लाभ सीधे प्रदान करना है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश में सहकारिता आधारित मोबिलिटी सेवा 'भारत टैक्सी' का शुभारंभ किया गया है। केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में इस सेवा की शुरुआत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी उपस्थित थे। यह सेवा अब लखनऊ के साथ-साथ गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में भी उपलब्ध होगी।
'भारत टैक्सी' का मुख्य आधार 'ड्राइवर ही मालिक है' का सिद्धांत है। पारंपरिक टैक्सी एग्रीगेटर मॉडल के विपरीत, जहां ड्राइवरों को अपनी कमाई का एक हिस्सा कमीशन के रूप में देना पड़ता है, यह सहकारी मॉडल ड्राइवरों को सीधे सेवा का भागीदार बनाता है। इससे कमाई का बड़ा हिस्सा सीधे सारथियों के खातों में पहुंचता है।
इस पहल की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि पिछले छह महीनों में 10 लाख से अधिक सारथी इस सेवा से जुड़ चुके हैं। अब तक लगभग 40 लाख यात्री इस सेवा का लाभ उठा चुके हैं और सारथियों के खातों में 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की गई है। उत्तर प्रदेश के पांच शहरों में लगभग 40 हजार सारथियों ने पंजीकरण कराया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना' पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इसके अलावा, उर्वरक सेतु मोबाइल ऐप और उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव डेटाबेस सेंटर के ऐप को भी लॉन्च किया गया। इन पहलों का उद्देश्य राज्य में सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक और पारदर्शी बनाना है।
सहकारिता मंत्रालय के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि देश भर में 80 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कम्प्यूटरीकरण पर काम चल रहा है। उत्तर प्रदेश में भी 6,300 पैक्स का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है। राज्य में सहकारिता सदस्यता अभियान के तहत 54 लाख से अधिक नए सदस्य जुड़े हैं, जिसे एक अनुकरणीय मॉडल बताया गया है।
मंत्री ने कहा कि सहकारिता अब केवल कृषि ऋण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे स्वास्थ्य, भंडारण और मोबिलिटी जैसे नए क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में सहकारी बैंकों को पुनर्जीवित करने और सहकारी महाविद्यालय की स्थापना करने की दिशा में भी कार्य जारी है। यह प्रयास प्रधानमंत्री के 'सहकार से समृद्धि' के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।