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उत्तर प्रदेश में साइबर ठगों का जाल: दो साल में बुजुर्गों से 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी

उत्तर प्रदेश में साइबर अपराधियों ने पिछले दो वर्षों में बुजुर्गों को अपना निशाना बनाकर करीब 12 करोड़ रुपये की ठगी की है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, ठगों ने डिजिटल अरेस्ट, मनी लॉन्ड्रिंग और मोबाइल हैकिंग जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया। पीड़ितों में सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी, डॉक्टर और प्रोफेसर जैसे प्रतिष्ठित लोग शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें बुजुर्गों को निशाना बनाया गया है। अमर उजाला की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों के भीतर साइबर ठगों ने बुजुर्गों से लगभग 12 करोड़ रुपये की राशि ऐंठ ली है।

ठगों ने इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए कई आधुनिक और जटिल तरीकों का सहारा लिया है। इनमें डिजिटल अरेस्ट, मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामले और मोबाइल फोन हैक करना शामिल है। इन तरीकों से अपराधियों ने बुजुर्गों को डरा-धमकाकर उनसे बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई।

इस ठगी का शिकार होने वालों में समाज के कई प्रतिष्ठित और सेवानिवृत्त लोग शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ितों में भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और डॉक्टर जैसे लोग शामिल हैं, जिन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई इन अपराधियों के हाथों गंवा दी।

साइबर अपराधी अक्सर खुद को सरकारी अधिकारी या जांच एजेंसी का सदस्य बताकर फोन करते हैं। वे पीड़ितों को यह विश्वास दिलाने में सफल हो जाते हैं कि वे किसी कानूनी मुसीबत में फंसने वाले हैं, जिससे बुजुर्ग घबराकर उनकी मांगों को मान लेते हैं।

यह मामला बुजुर्गों की सुरक्षा और साइबर साक्षरता की कमी को उजागर करता है। ठगों ने बड़ी ही चालाकी से बुजुर्गों की तकनीकी जानकारी के अभाव का फायदा उठाया है।

पुलिस और साइबर सेल की टीमें अब इन मामलों की जांच कर रही हैं। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में बुजुर्गों का शिकार होना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों को डिजिटल लेनदेन के प्रति अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी अनजान कॉल पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करना ही बचाव का सबसे अच्छा तरीका है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की सूचना तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर दें। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसीमूल रिपोर्ट देखें ↗