ताज़ा अपडेटउत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव: सपा की तीसरी सीट पर नजर, भाजपा खेमे में सेंधमारी की तैयारी
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उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव: सपा की तीसरी सीट पर नजर, भाजपा खेमे में सेंधमारी की तैयारी

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की दस सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया का आगाज हो चुका है। समाजवादी पार्टी अपनी दो सीटों की जीत को लेकर आश्वस्त है, लेकिन अब पार्टी ने तीसरी सीट पर कब्जा जमाने के लिए एक नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत भाजपा के विधायकों को अपने पाले में लाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की दस रिक्त सीटों के लिए चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनाव प्रक्रिया के आधिकारिक रूप से शुरू होने के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। समाजवादी पार्टी ने इस बार अपने संख्या बल के आधार पर दो सीटों पर जीत सुनिश्चित मान ली है।

पार्टी का मुख्य ध्यान अब तीसरी सीट को हासिल करने पर केंद्रित है। इसके लिए समाजवादी पार्टी ने एक विशेष योजना तैयार की है, जिसका लक्ष्य भाजपा के मौजूदा विधायकों को अपने पक्ष में करना है। इस रणनीति के माध्यम से सपा उन विधायकों को वापस लाने की उम्मीद कर रही है जो पहले पार्टी से जुड़े थे।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सपा नेतृत्व ने इस चुनाव को एक बड़ी चुनौती के रूप में लिया है। पार्टी के रणनीतिकार भाजपा के असंतुष्ट विधायकों से संपर्क साधने की कोशिशों में जुटे हैं। यह कवायद राज्य के राजनीतिक समीकरणों को बदलने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।

भाजपा के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है। सपा की इस सेंधमारी की रणनीति के बाद सत्ताधारी दल भी सतर्क हो गया है। पार्टी के भीतर से विधायकों को टूटने से बचाने के लिए आंतरिक स्तर पर मंथन का दौर शुरू हो चुका है।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए आवश्यक आंकड़ों का गणित काफी जटिल होता है। समाजवादी पार्टी को तीसरी सीट जीतने के लिए अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता है, जो केवल भाजपा या अन्य दलों के विधायकों के क्रॉस वोटिंग से ही संभव हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में जोड़-तोड़ की राजनीति और तेज होगी। सपा की यह रणनीति न केवल राज्यसभा चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकती है, बल्कि राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा भी तय कर सकती है।

फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सपा अपनी इस योजना में सफल हो पाएगी। भाजपा अपने विधायकों को किस तरह से सुरक्षित रखती है, यह देखना भी दिलचस्प होगा। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज होने की संभावना है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अजीत बिसारिया, अमर उजाला लखनऊमूल रिपोर्ट देखें ↗