उत्तर प्रदेश सरकार का सख्त निर्देश, अदालती कार्यवाही के दौरान सरकारी अधिकारियों के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य
उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालती प्रोटोकॉल को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य के सरकारी अधिकारी अदालत परिसर में मनमाने या रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर नहीं जा सकेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट में पेश होने वाले अधिकारियों को अब एक निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करना होगा। इस कदम का उद्देश्य न्यायिक परिसर की गरिमा और अनुशासन को बनाए रखना है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी अधिकारियों के लिए अदालती परिसर में प्रवेश को लेकर एक नया और सख्त नियम लागू किया है। अमर उजाला नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब अधिकारी कोर्ट के भीतर अपनी मर्जी के कपड़े पहनकर नहीं जा सकेंगे। इस निर्णय के तहत अतरंगी या भड़कीले परिधानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
अदालती प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। प्रशासन का मानना है कि न्यायिक कार्यवाही के दौरान अधिकारियों का पहनावा गरिमापूर्ण होना चाहिए। अब तक कई बार अधिकारियों के अनौपचारिक पहनावे को लेकर चर्चाएं होती रही हैं, जिसे देखते हुए यह निर्देश जारी किया गया है।
नए नियमों के मुताबिक, कोर्ट में उपस्थित होने वाले हर सरकारी कर्मचारी और अधिकारी को एक निश्चित ड्रेस कोड का पालन करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था अदालती मर्यादा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाई गई है।
अधिकारियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि वे कोर्ट परिसर में प्रवेश करते समय निर्धारित औपचारिक पोशाक में ही हों। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक अनुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस संबंध में संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस नई व्यवस्था से अदालती कार्यवाही के दौरान एकरूपता और गंभीरता बनी रहेगी।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने के संकेत दिए हैं। भविष्य में कोर्ट जाने वाले सभी अधिकारियों को इन नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।
यह निर्णय राज्य के न्यायिक कामकाज में सुधार और सरकारी अधिकारियों के आचरण को अधिक पेशेवर बनाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
