ताज़ा अपडेटउपराष्ट्रपति ने अरनमुला उथ्रित्तथी वल्लमकली का किया शुभारंभ, केरलम की सांस्कृतिक विरासत को सराहा
Vimarsh Naarad TV logoस्वतंत्र डिजिटल न्यूज़Vimarsh–Naarad TVखबर • विमर्श • जनता की आवाज़
डिजिटल संस्करणYouTube
समाचार श्रेणियां

उपराष्ट्रपति ने अरनमुला उथ्रित्तथी वल्लमकली का किया शुभारंभ, केरलम की सांस्कृतिक विरासत को सराहा

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पंबा नदी पर अरनमुला उथ्रित्तथी वल्लमकली का उद्घाटन किया। उन्होंने इस उत्सव को केरलम की समृद्ध परंपराओं और एकता का प्रतीक बताया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री के 'विकास भी, विरासत भी' के विजन पर जोर देते हुए सांस्कृतिक संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया।

आधिकारिक स्रोत की पोस्ट: X

उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने पंबा नदी के तट पर आयोजित अरनमुला उथ्रित्तथी वल्लमकली का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने इस आयोजन को केरलम की सांस्कृतिक विरासत, भक्ति और शाश्वत परंपराओं का एक गौरवशाली उदाहरण बताया। उपराष्ट्रपति ने इस दौरान राज्य के हालिया नाम परिवर्तन का उल्लेख करते हुए जनता को बधाई दी और ओणम के अवसर पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

अपने संबोधन में, उपराष्ट्रपति ने अरनमुला वल्लमकली को टीम वर्क, अनुशासन और खेल भावना का बेहतरीन प्रदर्शन करार दिया। उन्होंने बताया कि कैसे सजी-धजी पल्लियोडम नावें और सौ से अधिक नाविकों का लयबद्ध तालमेल इस उत्सव की भव्यता को बढ़ाता है। पंबा नदी के आध्यात्मिक महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने इसे सबरीमाला तीर्थयात्रा का एक अभिन्न हिस्सा बताया।

श्री राधाकृष्णन ने अपनी व्यक्तिगत सबरीमाला यात्राओं को याद करते हुए कहा कि भगवान अय्यप्पा का आशीर्वाद उनके जीवन में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने अरनमुला की विरासत, विशेष रूप से श्री पार्थसारथी मंदिर और जीआई-टैग प्राप्त अरनमुला कन्नाडी की प्रशंसा की। उन्होंने जोर दिया कि भावी पीढ़ियों के लिए पारंपरिक कलाओं और शिल्पों का संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि विदेशों में रहने वाले लोग भी अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए इन परंपराओं में भाग लेने आते हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक परंपराएं लोगों को उनकी संस्कृति से जोड़े रखने का सशक्त माध्यम हैं।

परंपरा और आधुनिकता के संतुलन पर बात करते हुए, उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के विजन को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता विभाजन का नहीं, बल्कि शक्ति का स्रोत है। कार्यक्रम में केरलम के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

स्रोत

मूल संदर्भ

01Press Information Bureauमूल रिपोर्ट देखें ↗